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नीतीश के लिए सुशील मोदी बने ‘अटल’, कोरोना की तीसरी लहर पर सिखाये ‘राजधर्म’

पटना
कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और विशेषज्ञ तीसरी लहर की भी आशंका जता रहे हैं। इन सबके बीच कोरोना की लहरों पर बिहार की सियासत भी हिचकोले खा रही है। कभी बिहार के डिप्टी सीएम रहे सुशील कुमार मोदी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए ‘अटल’ बनकर ‘राजधर्म’ की याद दिला रहे हैं।

सुशील कुमार मोदी का टारगेट बदल गया?
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी और बीजेपी के राज्यसभा सांसद पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार को लगातार सलाह दे रहे हैं। वैसे सुशील कुमार मोदी नीतीश कुमार या बिहार सरकार की तारीफ करने के लिए जाने जाते हैं। सुशील मोदी के टारगेट पर या तो राहुल गांधी रहते हैं या फिर लालू परिवार। कभी-कभी बीजेपी नेताओं का बचाव भी करते हैं। मगर पिछले दो दिनों में सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार को एक से बढ़कर एक सलाह दिए हैं।

नीतीश कुमार को ‘राजधर्म’ बता रहे सुशील मोदी
पहले ट्वीट में उन्होंने केंद्र सरकार के टीकाकरण अभियान की तारीफ की। सुशील मोदी ने कहा है कि ‘कोरोना की दूसरी लहर के बीच भारत सरकार ने 114 दिनों में 17 करोड़ डोज लगवा कर सबसे तेज टीकाकरण का रिकॉर्ड बनाया और मात्र 11 दिनों में 18 पार के लगभग 25 लाख युवाओं को भी पहली डोज लगा दी गई।’

दूसरे ट्वीट में सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को सलाह दी है। वैसे सुशील मोदी चाहते तो वो नीतीश कुमार को फोन पर, मिलकर या फिर चिट्ठी के जरिए भी मशविरा दे सकते थे। लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया का रास्ता चुना। ये उनकी मर्जी है। उन्होंने लिखा कि ‘लेकिन कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए सरकार को कोविड अस्पतालों में बच्चों के लिए अलग वार्ड और आईसीयू बनाने की तैयारी अभी से करनी चाहिए।’

ग्लोबल टेंडर पर भी सुशील मोदी ने दी थी ‘नसीहत’

चूंकि सुशील मोदी का राजनीतिक आधार बिहार में है। बिहार बीजेपी के सीनियर नेता हैं तो ये मानकर चला जा रहा है कि उन्होंने ‘सरकार’ से बिहार सरकार को सलाह दी है। इससे एक दिन पहले भी सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को ‘नसीहत’ दी थी। सुशील मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा कि ’18 से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को कोरोना का टीका लगाने की शुरुआत होने से 11 करोड़ की आबादी वाले बिहार को वैक्सीन की लाखों वायल की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में केवल केंद्र सरकार और स्वदेशी टीके पर निर्भर रहने की बजाय राज्य सरकार को दुनिया के किसी भी देश से कोरोना टीका प्राप्त करने के लिए ग्लोबल टेंडर निकालने पर विचार करना चाहिए।’

दूसरे राज्यों से बिहार सरकार को सीखने की सलाह
दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा कि ‘आंध्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे कई राज्यों ने कोरोना वैक्सीन के सीधे आयात की संभावना पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है। आंध्र के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ग्लोबल टेंडर निकालने के मुद्दे पर अनुरोध किया है। बिहार सरकार को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए, जिससे वैक्सीन की उपलब्धता में कोई कठिनाई ना हो।’

वैक्सीन की जरूरत समय पर पूरा नहीं की जा सकती’
अगले ट्वीट में उन्होंने कहा कि ‘बिहार सरकार कोरोना वैक्सीन और टीकाकरण के लिए 4,165 करोड़ रुपए खर्च करने की सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है। इसमें से 1000 करोड़ तत्काल आवंटित भी हो चुके हैं। ऐसे में धन की कोई कमी नहीं, लेकिन स्वदेशी दवा कंपनियां रातोंरात उत्पादन बढ़ा कर वैक्सीन की सभी राज्यों की जरूरत समय पर पूरा नहीं कर सकतीं, इसलिए ग्लोबल टेंडर का विकल्प अपनाया जाना चाहिए।’ दरअसल पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव प्रचार में भारतीय जनता पार्टी ने लोगों से मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने का वादा किया था।

कोरोना में ऐसे कीजिए काम, नीतीश को ‘सुशील’ सलाह
वैसे राज्यसभा सांसद बनने से पहले पिछले साल तक सुशील मोदी नीतीश के बगल में ही बैठा करते थे। बिहार के डिप्टी सीएम थे। कोरोना के पहले लहर में वो सरकार के फैसलों के भागीदार थे। भले ही सुशील मोदी आज नीतीश को ‘राजधर्म’ सीखा रहे हों लेकिन शायद वो भूल गए कि जब बिहार में चमकी बुखार बच्चों की जान ले रहा था, तब वो प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हुआ करते थे। काश! राज्य के बच्चों के लिए उस वक्त ये ‘राजधर्म’ उन्होंने याद रखा होता।

पटना एम्स में भी होगा बच्चों का टीका ट्रायल
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रफ्तार को देखकर देश के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी तीसरी लहर आने की भी प्रबल संभावना है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने तीसरी लहर कब आएगी इसको लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं दी है। लेकिन ये जरूर कहा है कि इसको लेकर काफी सचेत रहना होगा। वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए सरकारों ने तैयारी शुरू कर दी है। बच्चों को वैक्सीन लगवाने के बाबत भारत बायोटेक के वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए मंजूरी दे दी गई है। सुशील मोदी ने ही ट्वीट कर जानकारी दी है कि ‘2 से 18 साल के बच्चों के टीकाकरण को लेकर विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भारत बॉयोटेक को टीके के दूसरे एवं तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण की अनुमति दी है। अच्छी बात है कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए जिन केंद्रों को चुना गया है, उनमें पटना का एम्स भी शामिल है।’

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