देश

नींबू पानी वाले को 1.60 करोड़ का बिल थमाया डिस्कॉम, बीपी बढ़ा तो जैसे-तैसे संभाला

जयपुर : राजस्थान के नागौर जिले में लाखों बिजली उपभाेक्ता कोरोनाकाल में सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन डिस्कॉम अधिकारियों की लापरवाही के चलते उपभोक्ताओं काे मीटराें की रीडिंग लिए बिना ही दो से चार गुना अधिक राशि के औसत बिल थमाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं अपनी भूल और टाइपिंग एरर का हवाला देकर गरीबों को लाखों और करोड़ों के बिल भेजे गए हैं।

ऐसा ही एक मामला मकराना शहर में सामने आया है। यहां ठेले पर नींबू पानी बेचने वाले अब्दुल सत्तार को डिस्कॉम ने दो माह का बिल 1 करोड़ 59 लाख 96 हजार 143 रुपए बकाया का बिजली बिल भेज दिया। इतनी बड़ी राशि का बिल देखकर पीड़ित को पहले तो बिल पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब उसने आस-पड़ोस के लोगों को बताया और सभी ने यही कहा कि बिल में तो उतना ही बकाया है, तो पीड़ित का बीपी बढ़ गया, उसको जैसे-तैसे लोगों ने संभाला।

1 करोड़ 59 लाख 96 हजार 143 रुपए बकाया का बिजली बिल।

डिस्कॉम अधिकारियों को जब मामले की जानकारी लगी तो आनन-फानन में अपनी भूल सुधार और टाइपिंग एरर की बात कहते हुए देर शाम बिल को ठीक करते हुए 1500 रुपए बकाया का बिजली बिल बना दिया।

ऐसे बढ़ गई गरीब अब्दुल सत्तार की बीपी

अब्दुल सत्तार ने घर के लिए मात्र एक किलोवाट बिजली का कनेक्शन लिया हुआ है। लेकिन इस बार आए दो माह के बिजली बिल में रीडिंग 5 मई 2021 को 18,59,783 यूनिट आई। कुल बकाया 1 करोड़ 59 लाख 96 हजार 143 रुपए दर्शाते हुए बिल जमा करवाने की अंतिम तिथि 17 जून बताई गई। इसके बाद राशि जमा करवाने पर विलंब शुल्क 3,74,544 रुपए अतिरिक्त बताया गया।

जैसे ही अब्दुल सत्तार व उसके पुत्र सद्धाम ने बिजली बिल देखा उनके होश उड़ गए। अब्दुल सत्तार की तबियत बिगड़ गई और बीपी बढ़ गया। परिवार ने उसे संभाला और विभाग की बड़ी गलती मानते हुए तुरंत डिस्कॉम के सहायक अभियंता को मामले से अवगत कराया। बाद में डिस्कॉम कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर घरेलू मीटर की रीडिंग देखी तो उसमें मात्र 1555 यूनिट दर्शाई हुई मिली जो कि नया मीटर लगने के बाद पिछले कुछ महीनों की रीडिंग है। इससे पहले फरवरी में 220 और अप्रैल में 324 यूनिट का बिल अब्दुल सत्तार को दिया गया था।

मकराना के सहायक अभियंता एसके रावल का कहना है कि कोरोनाकाल में मीटर रीडर को फील्ड में ना भेजकर प्रोविजनल रीडिंग ही ली गई थी, जिससे यह गलती हुई है। अब शहर में मैन्युअल रीडिंग की जा रही है।

जिन्होंने बिल ठीक नहीं कराए उनका क्या?

लॉकडाउन पीरियड में अनेक उपभोक्ताओं को इस प्रकार के बढे दामों के बिजली बिल मिले हैं। मीटर रीडर्स ने मौके पर जाकर रीडिंग कलेक्ट नहीं की और अंदाजे से रीडिंग अंकित कर दी। औसत से ज्यादा बिल आने पर घरेलू बजट को लेकर सजग रहे लोगों ने तो तुरंत मीटर की जांच करवा ली जिससे उनके बिलों में सुधार हो गया। लेकिन जिन्होंने अब तक अपने बिलों की मॉनिटरिंग नहीं की है या रुपए जमा करवा चुके हैं, उनका क्या होगा। इसे लेकर अब डिस्कॉम अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।

Back to top button