उत्तर प्रदेश

‘ना तुम लौटकर आए, ना मकान बनवाए और ना वादा निभाए’

गुरुवार 14 फरवरी को ​जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में शहीद होने वाले वीरों में एक नाम यूपी के मैनपुरी के रहने वाले हेड कॉन्स्टेबल रामवकील माथुर का भी है. रामवकील की शहादत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया. मायके इटावा में रह रहीं पत्नी और तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है. लगातार बहते आंसुओं के बीच रुंधे गले से शहीद की पत्नी बोलती हैं कि पिछले रविवार को ही तो उनके पति यह कहकर घर से गए थे कि अगले महीने घर वापस आकर खुद का मकान बनवाएंगे. लेकिन उनका वादा पूरा नहीं हुआ.

शहीद की पत्नी गीता बताती हैं कि छुट्टी से वापस जाते समय उनके पति कहकर गए थे कि अगले महीने मार्च में आकर वह अपना खुद का मकान बनवाएंगे. गीता कहती हैं कि अब उन्हें मायके में रहते हुए अच्छा नहीं लगता, इसलिए उनके पति इटावा में ही वह अपने प्लॉट पर लोन लेकर घर बनवाने वाले थे.

अब उनकी शहादत की खबर मिलते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. खासतौर पर बड़े बेटे राहुल जिसकी उम्र अभी 12 वर्ष है, वह जो केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र है और उससे 2 साल छोटा साहुल जो कक्षा 7 में पड़ता है, दोनों अपने पापा को याद करते हुए अपने नाना ओर नानी की गोद से हटने का नाम नहीं ले रहे है.

शहीद का सबसे छोटा बेटा अंश भी अपनी मां की गोद मे रोते हुए जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर हुआ क्या घर में चीख पुकार क्यों मची है. 4 साल का अंश नहीं जानता कि उसके पापा अब कभी घर वापस नहीं आएंगे. इस दौरान शहीद की पत्नी की सरकार से नाराजगी भी दिखी. उन्होंने कहा कि सरकार कुछ करना नहीं चाहती है, तभी ये सब हो रहा है.

दन्नाहार थाने के विनायपुरा गांव के रहने वाले रामवकील 2001 में सिपाही के पद पर सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. जम्मू में तैनाती से पहले रामवकील अलीगढ़ में तैनात थे. दो साल पहले बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए उन्होंने अपने दोनों बड़े बेटे राहुल और साहुल का ए​डमिशन केंद्रीय विद्यालय इटावा में करवा दिया था, जिस कारण गीता अपने तीनों बच्चों को लेकर सास के साथ मायके में रह रही थीं.

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