उत्तर प्रदेश

नवोदय छात्रा की मौत का मामला : हाईकोर्ट की डीजीपी को टिप्पणी, एक माह में करें खुलासा


– नहीं तो कार्रवाई को रहें तैयार, अब तक हो चुके पांच संस्पेंड
मैनपुरी। भोगांव के जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रा अनुष्का की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले गुरुवार को फिर डीजीपी मुकुल गोयल फिर पेश हुए। हाईकोर्ट न्यायाधीश ने एक माह में खुलासा करने का समय दिया है। नहीं की स्थिति में कार्रवाई को तैयार रहने के लिए कहा है।

ज्ञात हो कि भोगांव के जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रा अनुष्का का शव फांसी पर लटका मिला था। छात्रा की मां ने परेशान करने, मारपीट कर फांसी पर लटकाने का आरोप लगाया था। डीएनए जांच में छात्रा के कपड़ों पर और शरीर पर मेल स्पर्म पाए गए। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर रहे। 24 अगस्त 2021 को हाईकोर्ट से हुए आदेश के अनुपालन में केश डायरी के साथ एसआईटी के सदस्य कोर्ट हाजिर हुए। कोर्ट को उन्होंने बताया कि 16 सितंबर 2019 को हुई घटना की एफआईआर 17 जुलाई 2021 को दर्ज कराई गई। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि तीन माह बीत जान के बाद भी अभी तक अभियुक्तों से पूंछतांछ क्यों नही की गई। मामले में विवेचना कर रहे विवेचक ने देरी का कारण भी नहीं बताया।

गौरतलब है कि छात्रा की मौत मामले में छात्रा के पिता राजेंद्र पाण्डेय ने विद्यालय के छात्र समेत पांच लोगों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए आईजी कानपुर मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में एसआईटी जांच टीम गठित की थी। जांच टीम में शामिल एसपी अजय कुमार भी थे। घटना का खुलासा के लिए एसपी ने 21 लोगों के पॉलीग्राफ टेस्ट कराए थे। 12 लोगों का डीएनए कराने के लिए ब्लड का नमूने लिए गए। जांच पूर्ण रूप से निष्पक्ष हो इसके लिए 10 और लोगों का डीएनए कराने का फैसला लिए गया।

इस मामले की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एन. भंडारी और जस्टिस ए.के. ओझा ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकेश गोयल समेत तमाम संबंधितों को कोर्ट में तलब किया। सुनवाई के दौरान डीजीपी द्वारा कोई भी संतुष्टिकरण जवाब नहीं दे पाए। जिस कारण कोर्ट ने डीजीपी को इलाहाबाद ना छोड़ने का फरमान सुनाया और कहा कि कल पूरी तैयारी के साथ कल कोर्ट में पेश होने का आदेश सुनाया। जिसके बाद डीजीपी ने देर शांय तत्कालीन एएसपी मैनपुरी, वर्तमान एएसपी एटा ओमप्रकाश और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी भोगांव, वर्तमान क्षेत्राधिकारी भदोही प्रयांक जैन को सस्पेंड कर दिया गया। इतनी बड़ी कार्यवाही से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

यह हुई गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई
गुरुवार को उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल कोर्ट में फिर पेश हुए। जिनके साथ आईजी मोहित अग्रवाल, मैनपुरी एसपी अशोक कुमार राय समेत एसआईटी के सदस्य भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सर्कुलर जारी कर धारा 173 का पालन कर एक माह में विवेचना पूरी करने का फरमान सुनाया। जिसमें कहा कि सभी पुलिस अधिकारियों को इस बाबत निर्देश दिए जाएं। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पुलिस को अभी और प्रशिक्षण देने की जरूरत है। ज्यादातर मामलों में तो विवेचना कांस्टेबल करता है, दरोगा तो कभी कभी जाता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में विवेचना सही ढंग से नहीं हुई है। जिसके बाद डीजीपी ने एएसपी और डीएसपी पर की गई कार्यवाही की जानकारी कोर्ट को दी।

अगली सुनवाई पर कोर्ट ने अनुपालन की पूरी रिपोर्ट देने के लिए कहा। आगे कोर्ट ने कहा कि हमारे देश में निष्पक्ष जांच ना होने से सजा का रेट मात्र 6.5 फीसदी है जबकि विदेशों में 85 फीसदी है। सही ढंग से विवेचना ना होने के कारण अपराधी बरी हो रहे हैं। आगे कोर्ट ने कहा कि यह घटना सुबह लगभग छः बजे की है। लेकिन परिवार को सूचना नहीं दी गई। कोर्ट ने अपनी मार्मिक टिप्पणी में कहा कि पुलिस बरामदगी की बजाय शस्त्र प्लांट करती रहती है। वैलेस्टिक रिपोर्ट मैच ना होने की वजह से अपराधी पूरी तरह से बरी हो जाते हैं। स्वर्ग कहीं और नहीं है, सभी को अपने कर्मों का फल यहीं भोगना पड़ता है। जांच में देरी होने के बाद भी साक्ष्य नहीं मिल पाते हैं और आरोपी समझ जाते है कि अब कुछ नहीं होगा। आगे कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि घटना का खुलासा एक माह में करें। कोर्ट की कार्रवाई को तैयार रहें। मामले की मॉनिटरिंग खुद डीजीपी करें जिनके साथ मॉनिटरिंग मैनपुरी के जिला जज भी करेंगे। खुलासा हर हाल में हो जाए।

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