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कल से नवरात्रि : जानिए कलश स्थापना का सही तरीका और वक्त

शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि बुधवार से प्रारम्भ हो रहे हैं। उत्तर भारत में जहां नवरात्रि की जोरदार तैयारी है, वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के नाम से इस नौ दिवसीय उत्सव की धूम है, गुजरात में इन दिनों गरबा और डांडिया के पंडालों में एक नयी ही रंगत देखने को मिलती है। कुल मिलाकर नवरात्रि के साथ ही उत्सवों की शुरूआत होने जा रही है।

नाव पर हो रहा है देवी आगमन

भारतीय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार माता का आगमन नाव पर हो रहा है, जो कि बहुत ही मंगलकारी है। वैसे भी शारदीय नवरात्रि को काफी शुभ माना जाता है। इसको शक्ति अर्जन का पर्व भी कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि से ही वातावरण में तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरूआत होती है।

कलश स्थापना का शुभ महूर्त

बुधवार को नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ महूर्त प्रातः 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक है। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद राहु काल लगने के कारण 12 बजे तक ही अभिजित महूर्त माना जा रहा है। इसलिये आपको कल कलश की स्थापना प्रातः 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजे के बीच ही कर लेनी चाहिये।

कलश स्थापना का तरीका

कलश स्थापना के लिये मिट्टी, तांबे या सोने का पात्र लें। पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ सफाई के बाद पहले गाय के गोबर रखें, फिर अक्षत और फूल रखकर कलश स्थापित करें। कलश में जल और पंच पल्लव डालें। कलश के चारों ओर गाय का गोबर लगायें। कलश के उपर एक पात्र में अनाज रखें, इसके बाद घी का दीपक जलाकर शोडशोपचार से माता रानी का विधिवत पूजन करें।

 

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