धर्म

नवरात्रि: मां दुर्गा की पूजा रात में ही क्यों होती है ?

क्या आपने कभी सोचा की नवरात्रि की पूजा आखिर रात में ही क्यों की जाती है? चलिए आपको बताते हैं.

नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है. मां दुर्गा के नौ रूप इस प्रकार हैं. मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और मां सिद्धिदात्री. नवरात्रि के हर दिन उनके अलग-अलग रूप की पूजा होती है. कहते हैं कि नवरात्र में शांत मन से मां की आराधना की जाए तो सिद्धि भी प्राप्त हो सकती है.

नवरात्रि की पूजा – नवरात्रि अर्थात नौ रातें इस शब्द का मतलब नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियों) से होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में रात के समय मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने से विशेष फल मिलता है.

दरअसल, रात का समय सिद्धि प्राप्ति के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसी कारण साधक दिन की बजाय रात में दुर्गा मां की उपासना करते हैं ताकि सिद्धियों को सिद्ध कर सकें. इसलिए ज़्यादातर त्यौहार रात के समय ही मनाए जाते हैं. नवरात्रि के दौरान भक्तजन रात में मां के अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं ताकि आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त सकें.

हिंदू धर्म के मुताबिक, भगवान की पूजा-अर्चना, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए शांत वातावरण का होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यदि ऐसा नहीं होगा तो हमारा मन स्थिर नहीं होगा और मन में भटकाव रहेगा जिससे पूजा दौरान भगवान का स्मरण करते वक्त भी ध्यान भटकता रहेगा. इसलिए साधना के लिए रात्र सबसे उचित समय माना गया है.

रात के समय किसी भी प्रकार की कोई भी रुकावट नहीं होती है. इसलिए जब साधक रात्रि पूरी तरह लीन होकर मां दुर्गा की आराधना करता है तो उसे न केवल विशेष फल की प्राप्ति है बल्कि सिद्धि प्राप्ति की संभावना भी रहती है.

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