उत्तर प्रदेश

नगर पंचायत किशनी में प्रधानमंत्री आवास योजना चढ़ रही भ्रष्ट्राचार की भेंट

– चाहे लाख करो तुम पूजा तीर्थ करो हजार, दीन दुःखी को ठुकराया तो सब कुछ है बेकार
– नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर हो रही लूट
– आवासों के लिये दी जा रही सरकारी पैसों का हो रहा बंदर बांट

किशनी/मैनपुरी। नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवासों के आवंटन में जमकर कमीशन खोरी की जा रही है। जो दलालों की मंशा पूरी कर देता है उसे डूडा कार्यालय द्वारा आवासों के लिये सरकारी धन मुहैया करा दिया जाता है। पर जो दलालों के मानकों पर खरा नहीं उतरता है। उसे ईश्वर के भरोसे ही रहना पडता है। गौर करने योग्य बात यह है कि ऐसे दलालों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी है। नगर पंचायत के वार्ड संख्या 9 गांव खड़सरिया निवासी सुनील पुत्र बाबूराम ईंट भट्टे पर कोयला झौंकने का काम करते हैं। पत्नी शान्ती के अलावा उनके तीन बच्चे भी हैं।

उसी आंगन में उनके भाई ब्रजेश तथा उनकी पत्नी दीपा अपने दो बच्चों के साथ रहती है। सुनील ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व जब उन्होंने सुना कि सरकार गरीबों के खातों में घर बनाने के लिये ढाई लाख रूपये तीन किस्तों में डाल रही है तो उन्होंने अपने सभासद से सम्पर्क साधा। बकौल सुनील उन्होंने किसी तरह एकत्र कर सभासद को दो हजार रूपये दिये और आवास के लिये नगर पंचायत में एक फार्म भर दिया। उनका कहना है कि उस दिन के बाद सभासद ने उनकी ओर रूख तक नहीं किया तथा आवास भी नहीं मिला। परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। रहने के लिये सिर्फ एक कमरा है जिसकी छत भी टूटी हुई है। जेठानी शान्ती देवी ने बताया कि उसकी देवरानी उसकी सगी बहिन है।

इसीलिये एक ही कमरे में दोनों परिवार रह लेते हैं। अन्यथा की स्थिति में उनके लिये खुले आसमान के नीचे गुजारा करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। गौर करने योग्य यह भी है कि आखिर किसकी जांच के बाद दो मंजिला धारकों तथा अपात्रों को आवास दिये गये और गरीब कैसे छूट गये। क्या प्रशासन उन अपात्रों की जांच करेगा। जिन्होंने एक ही परिवार में तीन और चार आवास ले लिये। आखिर एक ही परिवार के कई सदस्यों को आवास कैसे और क्यों मिल गये। सूत्रों की मानें तो आवास दिलाने वालों की पहुंच डूडा कार्यालय में बैठे बाबुओं तक है। कुछ रकम दलाल अपनी जेब में रखते हैं, बाकी सर्वेयरों तथा बाबुओं व अन्य सहयोगियों को दी जाती है।

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