क्राइम

देश भर में रेमडेसिवीर की कमी, लेकिन पंजाब की नहर में बह रही हैं हजारों Unused शीशी

भारत में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर शुरू होने के तुरंत बाद, भारत भर में दवा की दुकानों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगने की तस्वीरें तमाम समाचार पत्रों में भर गई थी। ये लोग केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवा रेमडेसिवीर खरीदने के लिए लाइनों में लगे हुए थे। रेमडेसिवीर की अचानक से मांग बढ़ने के कारण ही देश में इसकी किल्लत हो गई। जहां देश में एक तरफ रेमडेसिवीर इंजेक्शन की भारी कमी वहीं दूसरी तरफ पंजाब में रोपड़ जिले के गांव सलेमपुर में भाखड़ा नहर से रेमडेसिवीर और एंटीबायोटिक इंजेक्शन सेफोपेराजोन इंजेक्शन हजारों की संख्या में मिली है। हालांकि, यह इंजेक्शन नकली है या असली इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इस मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर तेजिंदर सिंह ने बताया कि,  “रेमडेसिवीर के करीब 671 इंजेक्शन मिले हैं। इसके साथ ही एंटीबायोटिक इंजेक्शन सेफोपेराजोन के 1456 से भी अधिक मात्रा में नहर से मिली है। इसके अलावा 849 बिना लेवल वाले इंजेक्शन हैं, जिनके प्रिंट पानी में धुल चुके थे।” सिंह ने बताया कि, इंजेक्शन पर सरकारी आपूर्ति लिखा हुआ था। हालांकि, यह सरकारी आपूर्ति किस राज्य के लिए है, इस बारे में कुछ नहीं लिखा है।

तेजिंदर सिंह ने इस मामले में आगे जानकारी देते हुए बताया कि, ” रेमडेसिवीर इंजेक्शन सात कंपनियां बनाती है। सातों कंपनियों का रोपड़ में कोई स्टॉकिस्ट नहीं है। यह जांच की जा रही है कि सरकारी सप्लाई वाले इंजेक्शन नहर में कैसे आए। नहर से मिले रेमडेसिवीर इंजेक्शन की फोटो जब उन्होंने अधिकारियों के सोशल मीडिया पर बने एक ग्रुप में शेयर की तो शुरुआती जांच में पता लगा है कि इंजेक्शन जाली हैं, लेकिन फिर भी जांच की जा रही है।”

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के साथ अब पुलिस भी इस पूरे मामले की जांच पड़ताल करने में जुटी हुई है। डीएसपी चमकौर साहिब सुखजीत सिंह विर्क ने आश्वासन दिया कि इस मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में केंद्र ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रेमडेसिवीर की आपूर्ति आवंटित की है। यह वह राज्य है जहां कोरोना संक्रमित के मामले ज्यादा है। गौरतलब है कि, पंजाब भी ऐसा ही एक राज्य है, जहां संक्रमित ज्यादा है।

आपको बता दें कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन की देश में कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए यह इंजेक्शन विदेशों से मंगाया जा रहा है। कमी को देखते हुए कालाबाजारी अथवा नकली इंजेक्शन भी काला बाजार में मिल रहा है।

ऐसे में पंजाब सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि वह पता लगाए कि नहर में पाए गए इंजेक्शन असली है या नकली, क्योंकि दोनों ही चिंताजनक है। अगर असली है तो इतनी मात्रा में बर्बादी कई अहम सवाल खड़ा करता है और अगर नकली है तो यह और ज्यादा चिंताजनक बात है, क्योंकि नकली इंजेक्शन का इस्तेमाल करके न जाने कितने लोगों की जान जा चुकी है या फिर जा सकती है।

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