मायानगरी

अंधाधुन: थ्रिलर-मिस्ट्री का तगड़ा डोज, एक बार देखना तो बनता है

आयुषमान खुराना की फिल्म अन्धाधुन
आयुषमान खुराना की फिल्म अन्धाधुन (image source: Bhaskar.com)

बॉलीवुड में अच्छी थ्रिलर फिल्म मुश्किल से बनती है। श्रीराम राघवन पहले एक हसीना थी, जॉनी गद्दार और बदलापुर जैसी रोमांच पैदा करने वाली फिल्में दे चुके हैं।  एक बार फिर वैसी ही रोमांचक फिल्म लेकर आए हैं। इस फिल्म में श्रीराम का हीरो एक अंधा म्यूजीशियन आकाश (आयुष्मान खुराना) है। यह फिल्म फ्रेंच शॉर्ट फिल्म ‘द पियानो ट्यूनर’ से प्रेरित है।

1. इस फास्ट और स्मार्ट फिल्म में अनएक्सपेक्टेड और दिलचस्प टर्न और ट्विस्ट देखने को मिलेंगे। फिल्म का क्लाइमैक्स शानदार है। थ्रिलर फिल्म के फिल्मांकन से जैसी उम्मीद की जाती है फिल्म उसके विपरीत है। राघवन ने फिल्म को मजेदार बनाने की पूरी कोशिश की गई है। इसमें 90 के दशक का जोशीला म्यूजिक और आनंददायक ह्यूमर डाला गया है।

2. आकाश अपने अंधेपन के कारण बहुत जल्द ही सहानुभूति प्राप्त कर लेता है। आकाश का एक डर्टी सीक्रेट है। इस फिल्म के लगभग सभी किरदार लालची हैं। वे अपने लालच के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। आकाश इत्तेफाक से अपनी ड्रीम गर्ल (राधिका आप्टे) से मिलता है।

आयुषमान खुराना की फिल्म अन्धाधुन (image source: Bhaskar.com)

3. ऐसा लगता है कि आकाश की लाइफ 90 के दशक के स्टार प्रमोद सिन्हा (अनिल धवन) से मिलने के बाद ट्रेक पर आ जाएगी। सिन्हा आकाश को घर पर पियानो बजाने के लिए बुलाते हैं। वह दूसरी पत्नी सिमि (तब्बू) को एनिवर्सरी पर सरप्राइज गिफ्ट देना चाहता है। सिन्हा के घर पर ऐसी चीजें समाने आती हैं जिससे तीनों हैरान रह जाते हैं।
4. आयुष्मान खुराना ने फिल्म में बेहतरीन अभिनय किया है। इसे उनका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन कह सकते हैं। वे किरदार में इस तरह डूब गए हैं कि इस फिल्म में उनकी जगह किसी और की कल्पना करना मुश्किल लगता है। तब्बू ने बूढ़े आदमी की बोरिंग वाइफ का रोल किया है जिसे वे मुश्किल से सहन करती हैं उनका किरदार जानदार है। उन्हें स्क्रीन पर देखने में मजा आता है।

आयुषमान खुराना की फिल्म अन्धाधुन
आयुषमान खुराना की फिल्म अन्धाधुन (image source: Gulf News)

5. अनिल धवन ने ओल्ड स्टार के रोल को बहुत अच्छे ढंग से निभाया है। दूसरे एक्टर्स जैसे कि पुलिस अफसर (मानव विज) उसकी वाइफ अश्विनी कलसेकर, लालची लॉटरी टिकिट बेचने वाली (छाया कदम) और बेशर्म बेईमान डॉक्टर जाकिर हुसैन सभी ने अच्छा काम किया है।

6. कहानी धीमी गति से शुरू होती है, जो कि आपको इमेजिन करने का पूरा मौका देती है लेकिन, फिर अचानक से इतनी तेज भागती है कि आप मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। पूजा लोथा की एडिटिंग बेहतरीन है। राघवन ने चीजों को ना तो बहुत साधारण रखा है ना ही उनका अधिक वर्णन किया है। वे दर्शकों को अनुमान लगाने का पूरा मौका देते हैं, जो फिल्म को और भी रोमांचक बना देता है। फिल्म के कुछ सीन अवास्तविक लगते हैं लेकिन अगर पूरी तरह देखा जाए तो फिल्म अच्छा अनुभव देती है।

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