उत्तर प्रदेश

…तो फिर कुछ इस तरीके से जिले में चल रहा है महिला सशक्तिकरण अभियान



अधिकारी ही लगा रहे हैं सरकार की  योजनाओं को पलीता
बीते कई माह से न्याय के लिये भटक रही है पीङित विधवा महिला

बाराबंकी ।  महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रदेश भर में महिला सशक्तिकरण अभियान चलाया जा रहा है अभियान में लंबा चौड़ा भाषण देकर अधिकारी उनको हक व अधिकार के प्रति जागरूक करते हैं लेकिन जब बात अधिकार व न्याय की आती है तो वही अधिकारी अपना हाथ पीछे खींच लेते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण जिले के थाना जैदपुर अंतर्गत टिकरा मुर्तजा निवासी विधवा महिला माया उर्फ सबीना  का है वह अधिकार पाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही है लेकिन न्याय दिलाना तो दूर अधिकारी उसकी सुनने की भी जहमत नहीं उठा रहे हैं जिससे विधवा महिला दर-दर भटकने को मजबूर है । दरअसल पूरा मामला यह है कि माया उर्फ सबीना ने वर्ष 2017 में अपना सब कुछ दांव पर लगा कर मुस्लिम समुदाय के युवक अब्दुल गनी से निकाह कर लिया था और बतौर पत्नी उसी के साथ रहने लगी थी लेकिन यह बात ईश्वर को भी नागवार गुजरी समाज से तो वह तिरस्कृत हुई ही साथ में  कुछ वर्षों के उपरांत पति अब्दुल गनी भी 2जून 2020 को अल्लाह को प्यारे हो गए तब असहाय महिला एक बार फिर अकेली पड़ गई ।

पहली पत्नी के से उत्पन्न पुत्रों ने उसे घर से निकाल दिया लेकिन भला हो  स्थानीय पुलिस का   जिसने रहने के लिए घर दिला दिया लेकिन अब प्रधान व सेक्रेटरी पीड़ित को वहां का बाशिंदा नहीं मान रहे हैं जबकि वोटर आईडी से लेकर आधार तक महिला के पास है फिर भी उसका परिवार रजिस्टर पर नाम अंकित नहीं किया जा रहा है जिसको लेकर पीड़िता बेहद परेशान है उसका मानना है कि मीडिया ही उसे न्याय दिला सकती है क्योंकि सेक्रेटरी से लेकर लेखपाल तक प्रधान के दबाव में कार्य कर रहे हैं खास बात यह है कि जहां एक ओर सरकार महिलाओं को अधिकार दिलाने की बात करती है वही स्थानीय स्तर पर अधिकारी सरकार की मंशा पर कितना खरे उतर रहे हैं इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है  l

 

Back to top button