उत्तर प्रदेश

तीस हजार दो प्रधानमंत्री आवास लो ! नगर पंचायत में हो रहा गरीबों के साथ बड़ा अन्याय

आखिर कब मयस्सर होगी गरीबों को छत
– इन बेघर बेचारों की किस्मत है तुम्हारे हाथ में, गरीबों की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा …..
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– जिनपर हो चुकी है एफआईआर, फिर से हो गये सक्रिय

किशनी/मैनपुरी – नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास उन्हीं को दिये जा रहे हैं। जिनकी जान पहचान डूडा कार्यालय में हो अथवा जो स्थानीय दलालों जिनमें कुछ जन प्रतिनिधि भी शामिल हैं को सुविधा शुल्क प्रदान करने की क्षमता रखते हों। अन्यथा की स्थिति में सिर्फ खुले आसमान की ओर ही देखना होगा कि कोई फरिश्ता आयेगा और उनकी दास्ताने बदहाली सुनेगा। चुनावों के समय गरीबों की मदद करने बाले स्वघोषित मसीहा भी अभी कुम्भकरणी नींद में हैं। उन्हैं गरीबों को वाजिब हक जो सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा है। गरीबों तक पहुंचाने की फुर्सत नहीं है। नगर पंचायत के गांव खड़सरिया में एक बेहद गरीब भमिहीन दम्पति श्याम सिंह शाक्य पुत्र प्रभूदयाल अपनी पत्नी कंचन व एक मासूम बच्चे के साथ एक टूटी फूटी झोपडी में रहता हैं। जीवन चलाने के लिये दूसरों की खेती और मजदूरी पर निर्भर है। इनके पास घर के नाम पर एक झोपडी भर है। जिस पर टूटा छप्पर तथा फटी पॉलिथिन पड़ी है।

झोपडी के अन्दर कुत्ते बिल्ली न घुसें इसके लिये बिना सीमेंट लगाये ही ईंटों को रख लिया है। बरसात के दिनों में झोपडी में जब पानी टपकता है तो पति पत्नी दोनों मिलकर अपने बच्चे को गोद में छिपाकर सारी रात जाग कर ही काट देते हंै। पूछने पर बताया कि उनके सभासद ने उनसे दस हजार रूपये मांगे थे जो उनके पास नहीं थे। इसीलिये किसी भी जन प्रतिनिधि ने यह मुनासिब नहीं समझा कि उस गरीब को भी एक आवास बनाने के लिये धनराशि सरकार से दिला दी जाये।

जो जनप्रतिनिधि चुनाव के समय जनता से चांद सितारे दिलाने का भरोसा दिलाते हैं। जीतने के बाद वही लोग सिर्फ अपने हितों को पूरा करने के लिये जीजान से जुट जाते हैं। इसके लिये सिर्फ जन प्रतिनिधि ही दोषी नहीं है। इसके लिये वह अधिकारी भी जिम्मेदार हैं जिनकी कृपा से दो मंजिला धारकों को आवास की किस्तें दीं जा चुकीं है। बताते चलें कि करीब दो वर्ष पूर्व पैसे लेकर आवास दिलाने की शिकायत डीएम से की गई थी। बाद में एडीएम बी.राम की ओर से दी गई तहरीर पर ग्यारह लोगों के खिलाफ एफआईआर भी हुई थी। उक्त घटना को समाचार पत्रों ने भी प्रमुखता से छापा था। दुस्साहस इतना कि वही लोग फिर से लोगों से पैसे लेकर आवास दिलाने के नाम पर रिश्वतखोरी कर रहे हैं।

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