ख़बरजरा हट के

तांत्रिक सेक्स है सबसे अलग, जानिए इसकी 6 खास बातें

तांत्रिक सेक्स को आर्गज्म के लिए जाना जाता है। तांत्रिक सेक्स कर रहा जोड़ा ज्यादा समय तक बिना चरम पर पहुंचे ही कामोन्माद का अनुभव करते हैं।

तांत्रिक सेक्स क्या है

“तंत्र” एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “एकमेव हो जाना”। तांत्रिक सेक्स का ज़िक्र प्राचीन लेखों में भी किया गया है। सेक्स की यह विधि भारत में करीब 6000 साल पहले संज्ञान में आई। प्राचीन हिन्दु और बुद्ध ध्यानयोगियो द्वारा सिखाया जाने वाला यह सेक्स मूलत: आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता था। इसका मुख्य उद्देश्य ईश्वर की अनुभूति है। पश्चिमी देशों में 18वीं शताब्दी के अंत में परसिया के प्रांत क्वाजविन में इसका अभ्यास  किया जाने लगा था। हालांकि 1960 के दशक में इसका ज्यादा प्रसार हुआ। एशिया मे यह आध्यात्मिक महत्व के लिए काम में लिया जाता था वहीं, पश्चिमी देशों में यह सेक्स आसानों के लिए मशहूर हुआ।

क्यों है तांत्रिक सेक्स अलग

तांत्रिक सेक्स को आर्गज्म के लिए जाना जाता है। अर्थात तांत्रिक सेक्स कर रहा जोड़ा ज्यादा समय तक बिना चरम पर पहुंचे ही कामोन्माद का अनुभव करते हैं। इसमें सामान्य कामोन्माद प्राप्त किए बिना एक प्रकार के विशेष कामोन्माद की अनुभूति होती है।

मसाज

कोई वॉर्म बॉडी मसाज ऑयल लें और एक दूसरे की छाती के बीच प्यार से मसाज शुरू करें। ऐसा करने से दिल से सीधा संपर्क होता है। अब एक दूसरे की आंखों में देखते हुएअंगुलियों की मदद से मसाज करते रहें। धीरे धीरे सीने के किनारों से भीतर की ओर सर्कल बनाते हुए मसाज करें। साथ ही गहरी सांस लेते रहें। ऐसा करने से आप दोनों के भीतर कमाल की भवनाएं प्रेरित हो उठती हैं।

जल्दबाजी न करें

कभी-कभी थोड़ा आलसी हो जना भी गलत नहीं होता। अगर आप सच में सेक्स का पूरा आनंद लेना चाहते हैं तो थोड़ा धीमा हो जाएं। इंटरकोर्स या फोरप्ले के दौरान थोड़ा ज्यादा समय लें, स्टोक लगाने में जल्दी न करें, बल्कि अपने समान्य समय से 30 सेकण्ड अधिक लें। इससे आप सेक्स का पूरी तरह से मजा ले सकेंगे और कमाल की अनुभूति होगी।

गहरी सांसें

अधिकांश महिलाएं सेक्स के दौरान अपनी सांसें रोक लेती हैं, खासतौर पर आर्गज्म के समय। ऐसा श्रोणि क्षेत्र में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन परिवहन कम हो जाने के कारण होता है। जबकि तांत्रिक सेक्स के अनुसार ऐ से में सतत और गहरी सांस लेते रहने से ध्यान केंद्रित करने और प्रणय का समस सीमा बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही यह आपके शरीर में यौन ऊर्जा फैलाता है।

सेक्स को नए तरीके से परिभाषित करें

यौन अंतरंगता को सिर्फ बेडरूम में ताला लगाकर ना रखें। इंटरकोर्स की अवधी क्या है, इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है कि आप इसका कितना आनंद ले पाते हैं। तो अपने सेक्स को दोबारा से परिभाषित करें। अप के लिए सेक्स की परिभाषा केवल मज़े और संभोग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आपके लिए सेक्स फरप्ले, मसाज, फ्लर्टिंग व वह सब कुछ होना चहिए जिससे आपकी यौन ऊर्जा बढ़ती है।

Back to top button