मायानगरी

तनुश्री हार सकती हैं नाना पाटेकर के खिलाफ केस, वकील ने बताईं ये 3 वजह

सेक्शुअल हैरेसमेंट के मामले हमेशा पेचीदा रहे हैं। इतने कि उनमें आरोपी को गुनहगार साबित करना मुश्किल होता है। सारे चश्मदीद गवाह अगर आरोपी के पक्ष में हैं तो विक्टिम के लिए आरोप साबित करना बहुत मुश्किल हो जाता है। बॉम्बे हाई कोर्ट के एडवोकेट आदित्य प्रताप ने इस मामले के सभी पहलू बताए। आदित्य वही एडवोकेट हैं, जिनके चलते मुंबई हाई कोर्ट ने मल्टीप्लैक्स में दर्शकों को अपना खाना लाने की छूट दी थी।

ये हो सकता है तनुश्री के केस में

  1. FIR में देरी से गवाही होगी प्रभावित

    आदित्य ने बताया- सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी अपने कई जजमेंट्स में कहा है कि FIR में देरी होने से गवाहों की याददाश्त प्रभावित होती है। ऐसा ही एक जजमेंट सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में भी दिया था, जिसमें नेहा राज सिंह ने यूपी गवर्नमेंट के खिलाफ केस किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था FIR में देरी होने से कहानी बदल गई है। तनुश्री का मामला तो दस साल पुराना है। ऐसे में चश्मदीद गवाहों की याददाश्त निश्चित रूप से अफेक्ट हुई होगी।

  2. मजबूत वजह होना जरूरी

    बकौल आदित्य- मेरे ख्याल से तनुश्री केस में देरी हुई है वह उनके पक्ष को कमजोर कर सकती है। उन्हें कोर्ट को देरी की वास्तविक और ठोस वजह देनी होगी। यह काम उन्हें सबूतों को जुटाने से पहले करना होगा। हम, आप और बाकी सब उनसे सहानुभूति रख सकते हैं, मगर तनुश्री को सबूतों के साथ ही आरोपी को गुनहगार साबित करना होगा। वजह अगर संतोषप्रद रही तो ही कोर्ट FIR को मेंटेन करेगी।

  3. यहां मिलेगा फायदा

    हालांकि मोल्स्टेशन के मामले में दस साल बाद भी एफआईआर की जा सकती है, मगर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन यह भी है कि दस साल की लम्बी देरी की ठोस वजह कोर्ट के सामने पेश करनी होगी।

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