खेलजरा हट के

डेल स्टेन : 21वीं सदी का सबसे महान तेज़ गेंदबाज़

जब आपके कानों में डेल स्टेन का नाम पड़ता है, तो मस्तिष्क में सर्वप्रथम क्या छवि सामने आती है? विश्व कप 2011 का वो मैच, जहां 267-1 से भारतीय टीम को इस एक गेंदबाज़ ने 296 पर निपटा दिया? अहमदाबाद का वो टेस्ट मैच, जहां इसके 5 विकेटों ने भारत कोकेवल 76 के छोटे स्कोर पर सिमटा दिया? यदि आप सचिन तेंदुलकर के बड़े प्रशंसक है, तो आप अवश्य प्रार्थना करते होंगे कि और कोई आए न आए, पर गेंदबाज़ी पे डेल स्टेन न आए। बड़े-बड़े बल्लेबाज़ इनसे भिड़ने से पहले दो बार सोचते थे। लेकिन अब यह ‘स्टेन’ गन फायर नहीं करेगी।

हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के इस उत्कृष्ट गेंदबाज़ डेल स्टेन ने क्रिकेट के लगभग सभी प्रारूपों से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है। अपने ट्वीट के अनुसार, डेल स्टेन लिखते हैं, “आज मैं आधिकारिक रूप से इस खेल से रिटायर हो रहा हूँ। अजीब है पर अच्छा है। मेरे परिवार से लेकर मेरे साथियों को मेरा आभार, जिन्होंने इस अभूतपूर्व यात्रा में मेरा साथ दिया। ट्रेनिंग, मैच, ट्रैवल, विजय, पराजय, जेटलैग, प्रसन्नता और भाईचारा के यह 20 वर्ष मैं नहीं भूल सकता। बहुत यादें सँजोई है। इसलिए अपने फेवरिट बैंड ‘द काउन्टिंग क्रोज़’ की ओर से ये धुन समर्पित करता हूँ।”

डेल स्टेन का जन्म मुस्लिम बाहुल्य फलाबोरवा कस्बे में हुआ था। वे बचपन से काफी डरपोक किस्म के थे, पर धीरे-धीरे उन्होंने अपने भय पर काबू पाना सीखा।  जब डेल स्टेन ने 2004 में दक्षिण अफ्रीका टीम में पदार्पण किया, तो उनका सामना मार्कस ट्रेसकोथिक और माइकल वॉन जैसे मंझे हुए खिलाड़ियों से हुआ, लेकिन स्टेन के नए व्यक्तित्व ने इन प्रभावशाली व्यक्तियों के समक्ष उसे अपना व्यक्तित्व संभालना सिखाया।

2007 तक डेल स्टेन केवल अपनी टीम में जगह बनाए रखने के लिए खेलते थे। लेकिन 2007 में जब पाकिस्तान की धरती पर उन्होंने पाकिस्तानियों को जमकर धोया, तो उनके अंदर का योग्य खिलाड़ी सबके समक्ष आया। इसके पश्चात उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा, और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण अफ्रीका की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ विजय में उन्होंने एक अहम भूमिका भी निभाई। डेल स्टेन जब तक दक्षिण अफ्रीका के टीम का एक अभिन्न अंग थे, इस टीम ने 2015 तक विदेश में एक भी सीरीज़ नहीं हारी। लेकिन एक तेज़ गेंदबाज़ की असल परीक्षा एशिया के धीमे, सपाट पिचों पर होती थी। यहाँ पर भी स्टेन निखरकर सामने आए

आंकड़ों का विश्लेषण करे, तो 42.9 के स्ट्राइक रेट और मात्र 24 रनों के औसत से उन्होंने एशिया से 92 टेस्ट विकेट प्राप्त किये। 93 मैचों में उन्होंने कुल 439 विकेट अर्जित किये, जिसमें उनका बेजोड़ रिवर्स स्विंग बहुत उपयोगी रहा, जो एशिया में बहुत मायने रखता था।

लेकिन इन उपलब्धियों के साथ साथ उन्हे चोटें भी खूब लगी। 2015 के पश्चात उन्हें चोटों ने काफी परेशान किया। 2015 में जब उन्हे कंधे पे चोट लगी, तो उन्हें काफी झटका लगा। न्यूज़ीलैंड के ग्रांट इलियट द्वारा अंतिम गेंद पर पड़ा छक्का भी उनके लिए काफी हानिकारक सिद्ध हुआ, यदि सेहत की दृष्टि से नहीं, तो कम से कम मानसिक दृष्टिकोण से अवश्य हुआ। टी 20 विश्व कप पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने टेस्ट से सन्यास लिया, परंतु कोविड ने उनके करियर को एक सुनहरा अंत देने के स्वप्न पर भी पानी फेर दिया।

फलाबोरवा के इस तूफ़ानी गेंदबाज़ की तुलना अक्सर जेम्स एंडरसन और मिशेल जॉनसन से की जाती है। जॉनसन अपने बॉउन्सर के लिए प्रसिद्ध थे, जबकि एंडरसन अपनी स्विंग गेंदबाज़ी के लिए के लिए। परंतु स्टेन इन दोनों से ही अलग थे। वे न केवल तेज़ थे, अपितु एंडरसन से भी तेज़ गति से स्विंग कराने में भी माहिर थे। इन दोनों गेंदबाजों के साथ-साथ खेलने के साथ के बावजूद स्टेन ने आईसीसी गेंदबाजों की टेस्ट रैंकिंग के शीर्ष पर 263 सप्ताह तक रहने का रिकॉर्ड बनाया। एक छोर पर स्टेन द्वारा बनाए गए डर ने मोर्ने मोर्कल, वर्नोन फिलेंडर और बाद में कगिसो रबाडा जैसे उनके साथियों की मदद की।

डेल स्टेन की इसी आक्रामकता को पूरा क्रिकेट जगत अब मिस करेगा। ये कई क्रिकेटरों के प्रतिक्रिया से भी स्पष्ट चलता है। उदाहरण के लिए विस्फोटक भारतीय बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट किया, “खुश रहो भले आदमी। आप अग्नि समान चमके, इस खेल के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक थे।” ब्रिटिश क्रिकेटर केविन पीटरसं ने ट्वीट किया, “यह लेजेंड था, हर स्थिति में सर्वोत्तम था!” ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ तेज़ गेंदबाज़ पैट कमिन्स ने ट्वीट किया, “एक अभूतपूर्व करियर के लिए बधाई। आपने विश्व के धाकड़ गेंदबाजों के लिए 20 साल का बेंचमार्क तय किया है। आपसे बेहतरीन प्रतिद्वंदी कोई हो ही नहीं सकता, अपना रिटायरमेंट इन्जॉय करें बंधु!”

Back to top button