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झुग्गी झोपड़ियों में रहा, पिता ने मेहनत मजदूरी करके पढ़ाया, आज हासिल किया खास मुकाम

माना संघर्षों में हमको, दुख उठाना पड़ता है, लेकिन सच ये भी है कि दुख के बाद हमें, सुख अनुभव का होता है, ऐसा सुख जिसको पाने के ख्वाब हम बचपन में देखते हैं. जी हाँ इस दुनिया का एक नियम बड़ा ही मशहूर है कहते हैं कि जिसने भी संघर्ष किया है, जिसने अपने आपको मेहनत की आग में जलाया है. जिसने मुसीबतों से लड़ना सीखा है. वो कामयाब जरूर होगा. तो चलिए आज आपका परिचय एक ऐसे ही इंसान से करवाते हैं. जो कभी झुग्गी-झोपड़ी में रहता था, घर के हालात भी बेहद ख़राब थे. जी हाँ उसके पिता कभी अखबार बेचते तो कभी मजदूरी करते थे. किसी तरह बस घर चलता था. और वो लड़का साइबर कैफे में बैठकर पढ़ता था. वो सोना तप रहा था. मेहनत लगी, जीत हुई और आज वो वैज्ञानिक बन गया है.

इस शख्स का नाम है आर्यन मिश्रा, जो आगे चलकर एस्ट्रोनॉमी के लेक्चरर बने, यहां तक कि आज वो भारत सरकार के साथ बतौर वैज्ञानिक सलाहकार काम कर रहे हैं. जी हाँ तमाम संघर्षों के बाद भी आर्यन ने हार नहीं मानी, वो दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहे, घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. इन सबके बाद भी वो कभी हार नहीं माने, न ही उनके पिता ने हार मानी, एक तरफ जहाँ वो आर्यन को पढ़ाने में कोई कमी नहीं होने देते थे. तो दूसरी तरफ आर्यन ने भी पिता का पूरा साथ दिया, कभी पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी.

वो पढ़ाई में शुरू से होशियार थे. पढ़ाई के दौरान ही आर्यन ने 14 साल की उम्र में ही एक एस्टेरॉयड की खोज कर डाली, बता दें ये एस्टेरॉयड उन्होंने All India Asteroid Search Campaign के तहत खोजा था. जब वो 11 वर्ष के थे, तब उन्होंने टेलिस्कोप की मदद से शनि ग्रह को देखा था, और इसके बाद से ही अंतरिक्ष को लेकर उनकी जिज्ञासा जागने लग गई. वो अंतरिक्ष की दुनिया की तरफ आकर्षित हुए और तभी से ठान लिया कि वो आगे चलकर एस्ट्रोनॉट बनेंगे।

आर्यन इतने तेज थे कि अपनी पढ़ाई के कारण अमेरिका में एस्ट्रोनॉट बनने के कोर्स के लिए सेलेक्ट भी हो गए थे, लेकिन उनके परिवार के आर्थिक हालत के कारण उनका सपना पूरा न हो सका. लेकिन वो हार नहीं माने. उन्होंने देश में रहकर ही कुछ करने की ठानी, पहले बी.एस.सी की और फिर बाद में फिजिक्स में स्नातक किया, इसके साथ ही आर्यन ने एक स्टार्टअप भी शुरू किया, जिसका नाम है स्पार्क एस्ट्रोनॉमी, वो कई स्कूल्स में एस्ट्रोनॉमी पर लेक्चर देते हैं. बच्चों को अंतरिक्ष की दुनिया को जानने समझने की लिए मशीनें भी उपलब्ध करवाते हैं.

बता दें कि आर्यन एक एस्ट्रोनॉमी लेक्चरर भी हैं, अब उन्हें विदेशों में भी स्पीच देने के लिए इंवाइट आया है. एयरोस्पेस में भी उनकी काफी गहरी नॉलेज है. बता दें कि वो एयरक्राफ्ट को डिजाइन करने में भारत सरकार की मदद कर चुके हैं. और अभी भी वो भारत सरकार के लिए बतौर वैज्ञानिक सलाहकार काम कर रहे हैं. आर्यन जैसे लोगों की कहानी बताती है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती

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