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झारखंड में ठीक होने वालों की संख्या हुई दोगुनी, फिर सख्त लॉकडाउन क्यों लगाई सरकार?

रांची. झारखंड में स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह को सख्ती के साथ 27 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इस दौरान सबसे ज्यादा पाबंदी लोगों के मूवमेंट पर लगाई गई है। लोग घरों से बाहर न निकले, इसके लिए निजी गाड़ियों पर रोक लगाने के साथ बसों के परिचालन को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

ये पाबंदियां ऐसे वक्त में लगाई गई हैं जब राज्य में संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से कम हो रही है। ठीक होने वालों की रफ्तार संक्रमित मरीजों से दोगुनी है। संक्रमितों की संख्या में कमी ने थोड़ी राहत तो जरूर दी है, लेकिन मौत के आंकड़े अभी डरा रहे हैं।

झारखंड में हर घंटे 5 लोग कोरोना से जंग हार रहे हैं। केवल मई महीने में 1522 लोगों की मौत इस जानलेवा बीमारी के कारण हुई है। इस दौरान राज्य का रिकवरी रेट और ग्रोथ रेट जहां तेजी से नीचे आ रहा है, तो मृत्यु का दर लगातार ऊपर जा रहा है। 30 अप्रैल को झारखंड की रिकवरी रेट 1.18 थी, वह 12 मई को वह बढ़कर 1.38 पर पहुंच गई है। यह राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। 12 मई को देश में मृत्यु दर 1.10% थी।

मौत में पड़ोसी राज्यों से भी आगे
वहीं इस माह के 11 दिनों में देश के बड़े राज्यों की तुलना में मृत्यु दर अधिक हो गई है। झारखंड में जहां 1,522 संक्रमितों की जान गई, वहीं उत्तर प्रदेश में 3,473, राजस्थान में 1,755, बिहार में 869, बंगाल में 1,249, ओडिशा में 172 और उत्तराखंड में 1,390 पॉजिटिव मरीजों की मौतें हुईं। झारखंड में इस समय हर दिन तकरीबन 100 लोगों की मौत हो रही है, जिससे मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।

पिछले साल 247 दिनों में हुई 1000 मौतें
राज्य में कोरोना की मारक क्षमता काफी खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल 247 दिनों में 1,000 मरीजों की जान गई थी, उससे अधिक 1,425 मरीजों की मौत मई के महज 11 दिनों में हुई है। गंभीरता यह है कि पिछले साल मौत का आंकड़ा 100 पहुंचने में लगभग 04 माह लग गए थे।

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