देशराजनीति

जुर्म की सियासत, भाजपा ने 20 तो कांग्रेस ने 30 दागी नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा

जयपुर: अपराध से राजनीति को अलग रखने की बात करने वाली दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव जीतने के लिए 50 दागियों को मैदान में उतारा है. इनमें कांग्रेस के 30 और भाजपा के 20 दागी उम्मीदवार शामिल हैं. इन सभी नेताओं ने नामांकन-पत्र दाखिल करते समय चुनाव आयोग में दायर किए गए हलफनामे में स्वयं के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को स्वीकार किया है.  

भाजपा द्वारा चुनावी रण में उतारे गए विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल दागी का नाम भी प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं. उनके खिलाफ तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार में गृहमंत्री रहते हुए जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप है, जिसकी सुनवाई अदालत में चल रही है. 

उनके अलावा राज्य के चिकित्सामंत्री कालीचरण सराफ, चिकित्सा राज्यमंत्री बंशीधर बाजिया, विधानसभा में मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर, विधायक शंकरलाल शर्मा, झाबर सिंह खर्रा, मदन दिलावर, लादूराम, उदयलाल डांगी, विकास चौधरी, खेमराज, मुकेश गोयल, संजय शर्मा कैलाश चौधरी, फूल सिंह मीणा, कैलाश चौधरी, चंद्रकांता मेघवाल और झाबर सिंह खर्रा का नाम भी ऐसे प्रत्याशियों में है, जिनपर कोई न कोई मामला दर्ज है.

वहीं कांग्रेस भी दागी नेताओं के मामले में कांग्रेस, बीजेपी से आगे है, कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे पूर्व मत्री परसादी लाल मीणा पर 12 साल पहले वर्ष 2006 से हत्या, साक्ष्य मिटाने एवं अमानत में खयानत का मामला दर्ज है. उनके अलावा विधायक महेन्द्रजीत मालवीय, अशोक चांदना, धीरज गुर्जर, दर्शन सिंह,भरोसीलाल जाटव,राजेन्द्र विधुड़ी, रमेश मीणा,प्रकाश चौधरी, आनंदीराम, रामलाल, रामनिवास, मुकेश भाकर, चेतन चौधरी, विजयपाल मिर्धा, पुष्कर लाल डांगी, नंदाराम, करण सिंह, मदन प्रजापत, हेमंत भाटी, राजेंद्र सिंह विधुड़ी, राकेश, अशोक चांडक, दौलत सिंह, वेद प्रकाश सोलंकी, लालचंद कटारिया, पुष्पेंद्र भारद्वाज, मनीष यादव, टीकाराम जूली, सुभाष मील एवं रामलाल भी आपराधिक मामलों में लिप्त उम्मीदवार हैं.

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