उत्तर प्रदेशख़बर

जितेंद्र यादव का सवाल- मुझे भी योगी की पुलिस ने मारी गोली, मुझे मुआवज़ा क्यों नहीं?

लखनऊ में पिछले दिनों पुलिसकर्मी द्वारा की गई एपल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हादसे के बाद से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सवालों के घेरे में है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार ने एनकाउंटर के नाम पर पुलिस को इतनी छूट दे दी है कि वह बेकसूरों को अपनी गोली का निशाना बना रही है।

इन्हीं आरोपों से बचने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विवेक तिवारी की पत्नी से मुलाकात की और उन्हें हर तरह की संभव मदद प्रदान करने का आश्वासन दे दिया।

इस मुलाकात के बाद विवेक की पत्नी ने बीजेपी और सीएम योगी की प्रशंसा भी की। लेकिन मुख्यमंत्री यह भूल गए कि सूबे में उनकी पुलिस की बर्बरता का शिकार सिर्फ विवेक तिवारी ही नहीं हुए। सूबे में ऐसे और भी लोग हैं जिन्हें एनकाउंटर के नाम पर पुलिस ने अपना निशाना बनाया है।

ऐसे ही लोगों की फेहरिस्त में एक नाम नोएडा के परथला गांव में रहने वाले बॉडी बिल्डर जितेंद्र यादव का है। जिन्हें इसी साल फरवरी में पुलिस ने एनकाउंटर के नाम पर अपना निशाना बनाया था। जो बाद में फर्जी साबित हुआ।

26 साल के यादव की जान तो बच गई लेकिन उनके शरीर के पेट से नीचे का हिस्सा पूरी तरह बेकार हो चुका है। जितेंद्र यादव का कहना है कि उन्हें योगी सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। सरकार ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। सरकार उनकी कोई मदद नहीं कर रही।

द इकोनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में जितेंद्र यादव ने कहा कि तिवारी के परिवार को योगी सरकार ने 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। इस राज्य में ये एक इंसान की ज़िदगी की कीमत है।

इससे भी बद्तर बात तो यह है कि सरकार ने मुझे कोई मुआवज़ा नहीं दिया। सरकार ने मुझे नज़रअंदाज़ कर दिया। मुझे योगी सरकार से कोई उम्मीद नहीं है।

यादव ने बताया, ‘घटना के बाद जब मैं फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती था तब केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा मुझसे मिलने आए थे। उस वक्त शर्मा ने कहा था कि जब तक मैं अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता तब तक सरकार मेरे साथ खड़ी रहेगी।

सरकार ने अस्पताल का सारा बिल तो भर दिया लेकिन उसके बाद मुझे छोड़ दिया। इसके बाद मुझे कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया। अब मैं हर महीने अपनी जेब से अपने इलाज पर 50 हज़ार रुपए ख़र्च करता हूं। जो मंत्री और विधायक उस वक्त मुझसे मिलने आए थे अब उनके पास मेरे लिए वक्त नहीं है’।

बता दें कि चार फरवरी की रात को जितेंद्र एक शादी से अपने घर लौट रहे थे तभी कथित तौर पर नशे में धुत सब-इंस्पेक्टर विजय दर्शन शर्मा ने उन्हें रोक लिया और थोड़ी सी कहासुनी होने पर उनपर गोली चला दी थी।जिसके बाद पुलिस ने मामले को एनकाउंटर का नाम देने की कोशिश की थी। जिसे बाद में फर्जी करार दिया गया था।

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