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जाहिद हुआ लिंचिंग का शिकार, यूपी की सरकारी कंपनी ने बताया अपराधी?

इसी साल जून में त्रिपुरा में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए ज़ाहिद को सरकारी बीमा कंपनी ओरिएंटल इंशोरियस ने अपराधी बताकर बीमा की रकम देने से इनकार कर दिया है। जबकि ज़ाहिद पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। परिजनों और पड़ोसियों ने बीमा कंपनी पर सांप्रदायिक भेदभाव का आरोप लगाया है।

बीमा कंपनी ने ज़ाहिद के घर पर जो चिट्ठी भेजी है, उसमें लिखा है, “मृतक की हत्या पब्लिक द्वारा की गई क्योंकि हत्या के समय मृतक अपहरण के प्रयास में अपराध में शामिल था। अतः मुख्यमंत्री किसान सर्वहित बीमा योजना के तहत हत्या के समय आपराधिक योजना में लिप्त होने के कारण दावा तय नहीं है। पत्रावली बंद की जाती है।”

दरअसल, दो बीघा ज़मीन के मालिक ज़ाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने उत्तर प्रदेश सर्वहित किसान बीमा योजना के तहत आवेदन किया था। इस योजना के तहत किसान की दुर्घटनावश मौत या हत्या होने पर उसके परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा मिलता है। लेकिन बीमा कंपनी ने ज़ाहिद को अपराधी बताते हुए मुआवज़ा देने से मना कर दिया।

जबकि एफ़आईआर में पुलिस ने ज़ाहिद को अपराधी नहीं बताया है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर अपनी तरफ से दर्ज की थी, जिसमें जाहिद को अपराधी नहीं लिखा गया है। ज़ाहिद की हत्या की जांच कर रहे त्रिपुरा पुलिस के अधिकारी जुगल किशोर ने बताया कि इस मामले की जांच में ज़ाहिद के अपराधी होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं और इसकी जानकारी हमने बीमा कंपनी को भी दी है।

बीमा कंपनी के इस रवैये पर जाहिद की मां शमसीदा बानो कहती हैं, “मेरे बेटे के खिलाफ पूरे हिंदुस्तान के किसी भी थाने में कोई रिपोर्ट हो तो मुझे फांसी पर चढ़ा दो। मदद नहीं करनी थी तो बता देते, कलंक लगाने की क्या जरुरत थी।”

वहीं उसके भाई जावेद का कहना है, “सरकार को हमारी मदद नहीं करनी है, ये बात समझ में आती है, लेकिन ये हमारे जख्मों पर नमक क्यों छिड़क रहे हैं। एक मर चुके आदमी पर लांछन क्यों लगा रहे हैं।”

इसके साथ ही जाहिद के गांव में भी बीमा कंपनी के इस रवैये को लेकर जबरदस्त गुस्सा है। वकील राव लईक ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा, “तहसीलदार की जांच में ज़ाहिद किसान साबित हुए हैं। उनके पास 2 बीघा (1/3 एकड़) ज़मीन है। उनके ख़िलाफ़ कहीं कोई आपराधिक मामला दर्ज नही है। बीमा कंपनी को इसका जवाब देना होग। हम उसे अदालत में घसीट लेंगे।”

वहीं जाहिद के गांव के साबिर का कहना है कि बस उसका मजहब मुसलमान है, इसलिए ये सब हो रहा है। ग़ौरतलब है कि जिस बीमा अधिकारी मूलचंद ने जाहिद को अपराधी बताने वाला पत्र जारी किया है उनपर पहले भी सांप्रदायिक भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं।

बता दें कि इसी साल 28 जून को त्रिपुरा के सिधाई मोहनपुर में फेरी लगाकर सामान बेचने वाले ज़ाहिद और उनके दो साथियों पर बच्चा चोरी की अफवाह में भीड़ ने हमला कर दिया था। पुलिस ने भीड़ से बचाने के लिए तीनों को थाने में छिपा लिया था। लेकिन भीड़ ने थाने में घुसकर उन पर हमला बोल दिया, जिसमें जाहिद की वहीं मौत हो गई थी।

Courtesy: Navjivan

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