जिंदगी

छोड़िये दवाएं-नुस्खे, दिनचर्या में ये 5 चीजें जोड़कर पत्नी को दें पूरा मजा

मर्दानगी की दुनिया दीवानी है. आदमी जेंटलमैन हो. खूब कमाता हो. और अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को बिस्तर पर संतुष्ट कर सके. और क्या चाहिए. हैं? जापानी तेल, पट्टियां, गोलियां, शिलाजीत, जाने क्या-क्या बिकता है मार्केट में आपको बेहतर मर्द बनाने के लिए. मगर हमारे पास कुछ और तरीके हैं. इससे पैसे नहीं खर्च होते. ट्राय करिए.

1. संवेदनशील बनें

‘दिनभर रोती क्यों हो? इतनी सेंटी क्यों हो? कोई मर गया है? तो मैं क्या करूं? डिस्टर्ब मत करो. तुम्हारे पूरे खानदान का यही प्रॉब्लम है.’ कितनी आसानी से इस तरह की चीजें आप अपनी पार्टनर/पत्नी को बोल देते हैं. सोचते भी नहीं. कहते हैं वो ही ओवररियेक्ट कर रही है. और जो भाई साब आप छोटी-छोटी बातों पर फ्रस्ट हो जाते हैं, वो जायज़ है? थोड़े संवेदनशील बनिए. इमोशनल जरूरतें समझिए.

2. हाउसवाइफ होने की इज्जत करें

उम्र में बड़े-बड़े पुरुष भी, जो शादी के 25 साल से ज्यादा बिता चुके हैं, तुनकते हैं तो पत्नी से कहते हैं, ‘तुम दिनभर घर पे करती ही क्या हो?’ अरे अंकल, आपकी पत्नी दिनभर घर पे क्या करती हैं, आपको कैसे पता होगा. आपतो कभी देखते ही नहीं. न उसे एकनॉलेज करते हैं. अगर आपकी पत्नी, जो हाउसवाइफ हैं, इतने साल से कुछ नहीं कर रहीं, तो आपकी गृहस्थी कौन चला रहा है. इतने साल से पैसे कौन जोड़ रहा है? और जिन बच्चों के सफल होने पर आप सीना फुलाकर घूमते हैं, उनको बड़ा किसने किया?

3. कामकाजी पत्नी की इज्जत करें

नौकरी वो भी करती है. नौकरी आप भी करते हैं. मगर ऑफिस से आकर घर का काम उसके कन्धों पर. सुबह का नाश्ता भी बनाए, शाम की चाय भी और रात का डिनर भी. कपड़े भी मशीन में डाल दे. प्रेस भी करवा दे. एकाध बार आप मदद कर देते हैं तो खुद को ही हीरो समझने लगते हैं. कि भाई मैं तो बड़ा अच्छा पति हूं. आपकी मम्मी भी नजर उतारने लगती हैं. बहू से कहती हैं तुम कितनी लकी हो. असल में वो लकी नहीं, अनलकी है, कि आप हफ्ते में सिर्फ एक बार ही उसकी मदद करते हैं. जबकि आपको रोज का काम बराबर बांटना चाहिए.

4. समाज और ऑफिस में कैजुअल सेक्सिज्म बंद कर दें

‘बकबक बहुत करती है. लगता है बड़े दिनों से उसे सेक्स नहीं मिला. लगता है बॉस के साथ चक्कर है. पता है उसके 3 ब्रेकअप हो चुके हैं. नई शादी हुई है, पति थका देता होगा तभी लेट आती है. वो तो लड़की है, ये असाइनमेंट हैंडल नहीं कर पाएगी.’ ऑफिस में बना सोचे समझे इस तरह की बेहूदा बातें बोलते हैं आप. ये भी नहीं सोचते कि आपकी पत्नी या बहन के ऑफिस में कोई उसके बारे में इसी तरह बोल रहा हो तो? अगर साथ काम करने वाली महिलाओं को दोस्ती और बराबरी से नहीं देखेंगे, वो भी कभी आपकी इज्जत नहीं करेगी.

5. महान बनना बंद कर दें

‘अरे मैं तो पत्नी को नौकरी करने देता हूं. शॉर्ट्स पहनने की इजाज़त देता हूं. फेसबुक पर भी है वो तो. भाई मैं तो उसके फोन का पासवर्ड नहीं मांगता. मैंने तो कहा शादी के बाद भी पढ़ सकती हो. मैं तो महिला सहकर्मियों को जल्दी घर भेज देता हूं. उनसे ज्यादा महनत नहीं करवाता.’ अरे जनाब, आप होते कौन हैं औरतों को आजादी देने वाले? वो नौकरी करती हैं, अपने मन के कपड़े पहनती हैं क्योंकि ये उनका हक़ है. उन्हें रोकने पर आप बुरे बनते हैं. पर उन्हें न रोकने पर आप महान नहीं बनते. वो आपकी पालतू गाय नहीं हैं.

Back to top button