उत्तर प्रदेश

छोटे बेटे को मुखाग्नि देकर लौटे थे पिता, घर पहुंचे तो पता चला कि बड़े को भी देना है कंधा

ग्रेटर नोएडा के जलालपुर गांव में कलेजे को कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां 8 घंटे के अंदर के दो भाई की मौत हो गई। एक बेटे को मुखाग्नि देकर लौटे पिता ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि थोड़ी देर बाद उन्हें दूसरे बेटे की अर्थी को भी कंधा देना होगा। अब दो जवान बेटों की मौत के बाद पिता सदमे में है। मां बार-बार बेहोश हो रही है। रिश्तेदारों का रो-रो कर बुरा हाल है। कोरोना वायरस ने 8 घंटे के भीतर दो जवान बेटों की जान ले ली।

बुखार, फिर खांसी और मौत

दो जवान बेटों के शवों को कंधा देने के बाद पिता अतर सिंह निढाल हो चुके हैं। सामने उनकी पत्नी आंखों में आंसू लिए बैठी हैं। अतर सिंह बताते हैं कि मेरे दोनों बेटे दीपक और पंकज की तबीयत खराब थी। हल्का सर्दी खांसी बुखार था। इलाके के ही डॉक्टर से इलाज चल रहा था। अचानक पंकज ने दम तोड़ दिया। हम सब उसको मुखाग्नि देकर लौटे ही थे घर में देखा कि बड़े बेटे दीपक की भी मौत हो चुकी थी। उसके शव से लिपटकर उसकी मां लगातार रोए जा रही थी। 8 घंटे के अंदर मेरे घर के दो जवान बेटे काल के गाल में समा गए।

15 दिन में 28 मौतें हो चुकी हैं इस गांव में

गांव वालों ने बताया कि पिछले 10 से 15 दिनों में गांव में 6 महिलाओं समेत 28 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। 28 अप्रैल से यह मौत का सिलसिला शुरू हुआ था जो जारी है। जलालपुर गांव निवासी रविन्द्र भाटी ने बताया कि उनके रिश्तेदार ऋषि नागर का भी अचानक देहांत हो गया था। उसी दिन उनके बेटे का भी देहांत हो गया। उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोगों की मौत घरों में हुई है। गांववालों के मुताबिक, सभी को पहले बुखार आया और ऑक्सीजन लेवल घटता चला गया। इसके बाद मौत हो गई। गांव में हो रही मौतों से सभी दहशत में है उनका कहना है गांव में ऐसा कोई घर नहीं बचा है जिसमें मरीज की चारपाई न बिछी हो।

दर्जन भर लोग अस्पताल में हैं भर्ती

गांव के ही प्रभु सिंह का कहना है कि 1 दर्जन से अधिक लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। लेकिन प्रशासन ने गांव में कोई मदद नहीं भेजी है। किसी बड़े अधिकारी ने गांव आकर गांव का हाल भी नहीं लिया। कोरोना के कारण गांव में हर कोई खौफ में है और डरा सहमा हुआ है। जिसके चलते जिस गांव में हमेशा चहलकदमी हुआ करती थी। आज उस गांव की सड़कें सुनसान पड़ी हैं। आलम यह है कि गांव के मुख्य मार्ग से कोई वाहन आता नजर आते है तो ग्रामीणों को लगता है की प्रशासन या फिर स्वास्थ विभाग की टीम गांव में आएगी और उनकी जान बचाएंगी।


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