उत्तर प्रदेश

गोरखपुर : यात्रियों की लापरवाही से फिर फूट सकता है कोरोना बम

गोरखपुर। एक बार फिर कोरोना से बचाव में लापरवाही शुरू हो गई है।रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वालों की जांच नहीं हो पा रही है।जांच सिर्फ कागजों में ही हो रही है।यदि उनमें संक्रमण होगा तो पूरे रास्ते बांटते हुए घर जाएंगे और गांव में भी फैला सकते हैं।देश के कई हिस्साें में अभी कोरोना संक्रमण फैला हुआ है। वहां से त्योहारों में लोग जिले में आ रहे हैं। संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए गए कदम नाकाफी हैं। रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर कोरोना जांच के बूथ सक्रिय कर दिए गए हैं। टीमें मौजूद हैं लेकिन सभी यात्रियों की जांच नहीं हो पा रही है। केवल रेलवे से प्रतिदिन हजारों यात्री गोरखपुर आते हैं।

जबकि जांच अधिकतम चार-पांच सौ की हो पा रही है। यह तब है जब विभाग दूसरी लहर के पूर्व बरती गई लापरवाहियों की भयावहता देख चुका है।मार्च में पंचायत चुनाव व होली के मद्देनजर दिल्ली-मुंबई से लोगों का आना शुरू हुआ। उस समय भी बूथ बनाए गए थे। जांच की यही स्थिति थी। यहां तक कि जो लोग पाजिटिव मिले, उन्हें भी छोड़ दिया गया। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ा और अप्रैल में स्थिति भयावह हो गई। अस्पताल फुल हो गए। मरीज तपड़ने लगे। दवाओं का संकट शुरू हो गया। आक्सीजन की कमी सामने आ गई। अनेक लोग अपने स्वजन को मरते देखते रहे। वह वेबस थे। वही गलतियां पुन: दोहराई जा रही हैं।बस से भी बड़ी संख्या में यात्री आते हैं लेकिन वहां कोरोना संक्रमण की जांच के लिए बूथ नहीं बनाया गया है। नोडल अधिकारी डा. एके सिंह ने कहा कि बस स्टैंड पर बूथ बनाया गया था। लेकिन बूथ रोडवेज परिसर में था और बसें सड़क पर सवारी चढ़ाती-उतारती हैं। इसलिए यात्री परिसर में पहुंच नहीं पाते थे। उनकी जांच नहीं हो पा रही थी।

इसलिए वहां से बूथ हटा दिया गया है। रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर भी जबरदस्ती हम किसी यात्री की जांच नहीं कर सकते। उन्हें स्वेच्छा से बूथ पर जाकर जांच करा लेनी चाहिए। जब ट्रेन आती है तो स्वास्थ्य कर्मी वहां खड़े होकर लोगों को जांच कराने के लिए प्रेरित करते हैं लेकिन यात्री बेपरवाह हो आगे निकल जाते हैं।

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