उत्तर प्रदेश

गोरखपुर में बेकाबू कोरोना : तीन ग्राम पंचायत के आठ गांव…10 दिन में सैकड़ों मौतें !

गोरखपुर :  उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां कोरोना से ताबड़तोड़ मौतें हुई हैं। गोरखपुर के ब्रह्मपुर, सहजनवा, पीपीगंज के आधा दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों घरों के पुरुष सिर का मुंडन कराए दिख रहे हैं। यह मुंडन किसी और वजह से नहीं, बल्कि कोरोना से घर में हुई मौत के बाद कराया है। ग्रामीणों की यह तस्वीरें मौत के आंकड़े को बयां कर रही हैं।

तीन ग्राम पंचायत के आठ गांव…10 दिन में सैकड़ों मौत

ग्राम पंचायत ब्रह्मपुर, सहजनवा और नगर पंचायत पीपीगंज के कुल आठ गांवों को मिलाकर पिछले दस दिनों में कोरोना से सैकड़ों मौत हुई हैं। ब्रह्मपुर के पचदेवरी गांव निवासी शेखर दुबे ने बताया कि ब्रह्महपुर में 30 से अधिक लोगों की कोरोना से मौत हुई है। बीते 4 मई को एक ही परिवार में पिता राम अनुज दुबे और उनके दो पुत्र प्रदीप दुबे और सर्वेश दुबे की मौत हुई। इसके बाद 8 मई को पड़ोस के एक युवक की मौत फिर एक युवा शिक्षक संत कुमार द्विवेदी के बाद पिपरहिया टोले के अधिवक्ता देवेंद्र नाथ त्रिपाठी सहित अबतक 30 लोगों की कोरोना से मौत हो गई है।

सहजनवा के पॉली ब्लॉक के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम किशोर मिश्रा की शुक्रवार को कोरोना से मौत हो गई। इसके साथ ही नेवास, डुमरी और रिठुआखोर को मिलाकर अभी तक कुल 35 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। पाली के बीजेपी मंडल महामंत्री त्र्यम्बक उपाध्याय ने बताया कि सिर्फ रिठुआखोर में अभी तक 15 लोगों की ऑक्सिजन लेवल कम होने की वजह से मौत हो चुकी है।

नेवास गांव की बात करें तो अंजनी कुमार तिवारी की कोरोना से मौत हुई। इसके बाद पांच मई को वार्ड नं.-32 से नव निर्वाचित बीडीसी चुनी गईं सवारी देवी के 55 वर्षीय साहलाद की मौत के बाद सिलसिला जारी रहा और अभी तक इन तीन गांवों को मिलाकर 35 मौत हो चुकी है।

नगर पंचायत पीपीगंज के रामुघाट रानाडीह,तिघरा गांव में भी कोरोना से मौत का सिलसिला जारी है। पीपीगंज निवासी आलोक मल्ल ने बताया कि पीपीगंज में पिछले 10 दिन के भीतर कोरोना से 20 से अधिक मौते हुईं हैं। शुक्रवार को तिघरा गांव में कोरोना से दो मौत हुई है।

हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के बाद पुरुष क्यों मुड़वाते हैं सिर?
अक्षय ज्योतिष संस्थान के पंडित रविशंकर पांडेय ने बताया कि गरुण पुराण में कहा गया है कि मृतक के अंतिम संस्कार के बाद 10 दिन तक उसकी आत्मा परिजनों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। आग देने वाला अपने करीबी को अग्नि के हवाले करके अशुद्ध हो जाता है, जिसके बाद अपने आप को शुद्ध करने के लिए अपना बाल दानकर करता है। इसके साथ ही सिर मुंड़वाने के बाद मृतक आत्मा को देवदूत अपने साथ ले जाते हैं। इसे क्षौर कर्म कहते हैं।

Back to top button