जरा हट के

क्यों कोई “अगम कुआं” के रहस्य को कोई सुलझा नहीं पाया?

ये कुंआ गवाह है अशोक के उस युग का जब उसने बड़ी ही बेरहमी से अपने 99 भाइयों का कत्ल करा दिया था, ये कुंआ गवाह का अशोक के उस गुप्त खजाने का जिसकी सटीक जानकारी अब तक किसी को नहीं मिली है। इस कुंए के गर्भ में छिपे राज को सदियों से बाहर लाने की कोशिश शुरू हुई, जो अब तक जारी है, लेकिन आज तक इस कुंए पर पड़ी रहस्य की चादर को कोई हटा नहीं सका है, कहते हैं कि खजाने की ललक में अंग्रेजों ने भी इस कुंए का पानी निकालने की कोशिश की थी, लेकिन कुंए का पानी तो कम नहीं हुआ वहीं पटना और आसपास के इलाकों में बाढ़ आ गई। अंग्रेजों से लेकर बिहार सरकार सबने कुंए के रहस्य से पर्दा उठाना चाहा, लेकिन सबको मुंह की ही खानी पड़ी। आज तफ्तीश होगी, चक्रवाती अशोक से जुड़े उसी रहस्यमयी कुंए की जिसका नाम ही उसकी खासियत बयान करता है। वो कुंआ है अगमकुआं।

अगम कुएं में दफ्न हैं हज़ारों लाशें

बिहार की राजधानी पटना में सदियों से है रहस्यमयी अगम कुआं, कहा जाता है कि सम्राट अशोक ने सत्ता की चाह में अपने 99 भाइयों का कत्ल करवा कर उनकी लाशें इसी कुंएं में फेकवा दी, अशोक के उन भाइयों की लाश कहां गई ये भी आज तक पता नहीं चल पाया। उस वक्त बिहार में सत्ता के लिए खून खराबा आम था, सत्ता के लिए भाई भाई का खून बहा रहा था, उस वक्त सम्राट अशोक भी इसी नक्शे कदम पर चले, अशोक के सिर पर सम्राट बनने की सनक सवार थी, लेकिन सत्ता और अशोक के बीच में आ रहे थे उनके 99 भाई। उन्होने अपने एक दो तीन या चार नहीं बल्कि सभी 99 भाइयों का बड़ी ही बेरहमी से कत्ल करवा दिया, बिहार के इतिहास ये उस वक्त का बड़ा हत्याकांड था। और फिर अशोक ने अपने भाइयों की लाश को पटना के इसी अगमकुआं में फेकवा दिया। इतने बड़े हत्याकांड ने अशोक की छवि एक क्रूर शासक की बना दी।

कहां गए अशोक के 99 भाईयों के शव?

इतना ही नहीं इतिहासकार यहां तक बताते हैं कि अशोक ने सिर्फ अपने भाइयों के शवों को ही इस कुएं में नहीं फिकवाई, बल्कि उस वक्त सत्ता और अशोक के बीच जो कोई भी आया, अशोक ने उसे ठिकाना लगाने के लिए इसी कुंए का इस्तेमाल किया, और ये सब तब तक चलता रहा, जब तक अशोक का हृदय परिवर्तन नहीं हुआ। यानी अशोक ने राज पाठ का त्याग नहीं किया, अशोक के वक्त में भारत की यात्रा पर तमाम चीनी दार्शनिक भी अपनी किताबों में इस बात का जिक्र करते रहे हैं। अशोक के भाइयों और उनके विरोधियों के शव कहां गए, ये इतिहासकारों से लेकर, अब के वैज्ञानिकों के लिए भी रहस्य का एक ऐसा विषय है, जिससे अभी तक चादर हट नहीं पाई है, सबसे बड़ी बात तो ये कि इतने शवों के कुएं में डाले जाने के बाद भी कुंए से हमेशा पीने का पानी निकाला जाता रहा है, और पानी के स्वाद में तनिक भी परिवर्तन नहीं आया।

क्या है इस कुएं का रहस्य?

अब सवाल ये उठता है कि इतने शवों को गुम हो जाने के पीछे कहीं कुएं की गहराई तो नहीं है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि मौसम चाहे कितना भी कठोर क्यों न हो जाय, सूरज धरती पर कितनी भी तपिश क्यों न बरसाए, जमीन के ऊपर त्राही त्राही क्यों न मच जाय़, लेकिन अपने गर्भ में लाखों रहस्यों को समेटे पटना का ये कुआं आज तक नहीं सूखा, सूरज की तपिश में भी पटना का ये अगमकुंआ बिल्कुल वैसा ही होता है, जैसा आम दिनों में। हां कुंए के पानी का स्तर महज एक से डेढ़ फीट तक कम होता है। वहीं बरसात के मौसम में जब दूसरे कुएं पूरी तरह से भर जाते हैं, उस वक्त भी इस कुंए में कोई परिवर्तन नहीं होता। ठीक गर्मियों की तरह कुएं का वाटर लेवल महज एक से डेढ़ फीट तक उपर आता है।

Back to top button