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कोरोना से पति की मौत, अंतिम संस्कार को मदद मांगती पत्नी को किया क्वारैंटाइन, 6 दिन पड़ा रहा शव

छह दिन बाद पति के शव को मुखाग्नि देती पत्नी

पटना. 

कोरोना समाज का कौन-कौन सा रूप दिखाएगा, इसका कोई अंत नहीं है। बिहार के बेगूसराय से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। पति का शव प्लास्टिक में लिपटा पोस्टमार्टम हाउस में छह दिन तक पड़ा रहा, क्योंकि उसकी पत्नी को गांव वालों ने जबरन स्कूल में क्ववारैंटाइन कर दिया था। मंगलवार को पत्नी ने सिमरिया स्थित श्मशान घाट पर पति को मुखाग्नि दी।

इलाज के लिए पत्नी के साथ आया था अस्पताल

​​​​​​मुंगेर जिले के रामनगर थाना के बड़ैचक पाटन निवासी विकास कुमार (38) की तबीयत खराब थी। पत्नी कंचन देवी 13 मई की सुबह उसे लेकर बेगूसराय सदर अस्पताल पहुंची। जहां इलाज के दौरान 13 मई की रात नौ बजे उसकी मौत हो गई। कंचन के मायके (समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना के पतैलिया गांव) से उसकी मां मीना देवी और उसके दो पड़ोसी अस्पताल आए थे। मौत के बाद दोनों पड़ोसी छोड़कर भाग गए। मौत से घबराई कंचन व मीना देवी अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगने अपने गांव पतैलिया वापस आ गई।

गांव आने पर कंचन और उसकी मां को कर दिया गया था क्ववारैंटाइन

कंचन ने अपने पति की मौत के बाद अपने सुसराल पाटन के लोगों से मदद मांगी। मदद नहीं मिलने पर कंचन देवी और उसकी मां मीना देवी अपने गांव पतैलिया वालों से मदद लेने पहुंची, लेकिन गांव वालों को पहले ही मालूम हो गया था कि उसके पति की मौत कोरोना से हो गई है। इसके बाद लोगों ने बिना कोई बात सुने गांव के ही एक स्कूल में मां-बेटी को क्ववारैंटाइन करवा दिया।

6 दिनों तक अस्पताल प्रशासन भी बना रहा लापरवाह

छह दिनों तक किसी तरह क्ववारैंटाइन रहने के बाद कंचन व मीना देवी वहां से भागकर 18 मई की सुबह सदर अस्पताल पहुंची और शव की खोज की तो विकास का शव सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम में पड़ा मिला।

शव को कांधा देने के लिए पहुंचे सीओ बरौनी

जिला प्रशासन को जानकारी दी गई कि शव के अंतिम संस्कार के लिए इन दो महिलाओं के अलावा और कोई नहीं है। फिर सदर एसडीओ के निर्देश पर बरौनी सीओ सुजीत सुमन घाट पहुंचे। उनके साथ कृष्ण झा, अनिल कुमार, भरत कुमार, अमर कुमार, मनीष कुमार, सुनील कुमार, जाटो कुमार के सहयोग से शव का अंतिम संस्कार किया गया।

अपने अंदर हिम्मत समेटे थी कंचन
तीन बच्चों की मां कंचन देवी का कलेजा सूखा पड़ा था। उसकी आंखों में एक बूंद भी आंसू नहीं थे। कंचन देवी की मां मीना देवी घाट पर भी फूट-फूट कर रो रही थी। उसको इस बात की चिंता थी कि उसकी बेटी अपनी जिंदगी कैसे गुजर बसर करेगी। कंचन देवी को 5 वर्ष और 3 वर्ष का दो लड़का और 2 वर्ष की एक बेटी है। कंचन कहती है कि उसको कोई भाई नहीं है। इसी कारण गांव वाले भी मदद को नहीं पहुंच पाए। विकास भी भाई में अकेले था और उसके मां-बाप दोनों ही इस संसार को पहले ही छोड़ चुके हैं।

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