उत्तर प्रदेश

कोरोना संक्रमित के अधजले शव छोड़कर चले गए परिजन, मचा हड़कंप

संवेदनहीनता : स्वजनों की लापरवाही से शव को कुत्ते नोंचकर लगे खाने, मचा हड़कंप


-उपजिलाधिकारी ने श्मशान घाट का निरीक्षण कर लिया जायजा
-गोला मुक्तिधाम घाट का मामला

अश गोरखपुर। वैश्विक महामारी कोरोना की भयावहता ने मानव प्रवृति को ही बदल डाला है।इस महामारी में अपनो को खोने के दुख ने बहुतों को झकझोर कर रख दिया। अपनों के खोने के गम व महामारी की विभिषिका के डर में बहुत से संक्रमितों के शव को स्वजन अस्पताल पर ही सरकार व नगर निगम के भरोसे छोड़ दे रहें तो वहीं कुछ लोग शव लेकर श्मसान घाट तक पहुंचने के बावजूद सम्मान से अंतिम संस्कार भी नही कर रहे। जो संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

ऐसी ही एक तस्वीर गोला उपनगर के बेवरी मुक्तिधाम पर बुधवार को आई। जहां विगत तीन दिनों में नौ कोरोना संक्रमितों का दाह संस्कार किया गया। मुक्तिधाम पर कोरोना संक्रमित के शव दाह के लिए कोई पृथक जगह चिन्हित नही होने के कारण वहीं पर सामान्य व संक्रमित दोनों का शव दाह किया जा रहा है। बुधवार को भी एक कोरोना संक्रमित का शव लेकर परिजन मुक्तिधाम पर पहुंचे। और घाट पर नीचे की तरफ सजी चिता पर षव को रख शवदाह कर दिया। अब इसे अपनों को खो देने का गम कहें अथवा कोरोना का डर स्वजन अधजले शव को छोड़कर ही चलते बने। शव के अवशेष को नदी में प्रवाहित करने की परंपरा का भी निर्वहन नही किए। जिसके बाद आस-पास भटकने वाले आवारा कुत्ते शव के पास नोंचने खाने लगे। जिसे देख घाट पर शवदाह करने पहुंचे अन्य लोग परिजनों की इस संवेदनहीनता को कोसते रहें। घाट से जुड़े लोगों के साथ ही कस्बे व गांव के लोगों ने मुक्तिधाम घाट पर कोरोना संक्रमित के शवदाह के लिए पृथक व्यवस्था करने की मांग किया। जिससे इन संक्रमितों के शवों से घाट पर आने-जाने वालों के साथ ही गांव के लोग संक्रमित ना हो जाय।
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संक्रमित शवों का नहीं करा रहे हैं रजिस्ट्रेशन

मुक्तिधाम के अध्यक्ष एडवोकेट बीरबहादुर चंद ने बताया कि मुक्तिधाम घाट पर शवदाह के लिए प्रयाप्त जगह है। बावजूद इसके सामान्य शवदाह के जगह पर लोग शवदाह कर रहे। इसके इतर कोरोना संक्रमित के शवदाह के लिए आने वाले लोग संक्रमित के शवदाह का पंजीकरण नही करा रहें। जिससे इनकी सही जानकारी नही हो पा रही।
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उप जिलाधिकारी ने श्मशान घाट का किया निरीक्षण।

शवों अधजला छोड़कर चले जाने कि सूचना मिलने पर उपजिलाधिकारी गोला राजेन्द्र बहादुर ने श्मशान घाट का निरीक्षण किया तथा संक्रमित शवों के दाह-संस्कार की अलग व्यव्स्था कराने की बात कही।

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