उत्तर प्रदेश

कोरोना की क्रूरता : दो जवान बेटों की लाश को कंधा देने के बाद पिता ने भी तोड़ा दम

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में कोरोना की क्रूरता का कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां महज दो हफ्ते में दो भाइयों और उनके पिता की संक्रमण से मौत हो गई। देखते ही देखते एक हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया।

जलालपुर गांव में रहने वाले अतर सिंह के दो बेटों की 9 मई को कोरोना से मौत हो गई थी। बीते शनिवार को इलाज के दौरान अतर सिंह ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया। गांव वालों के मुताबिक, 28 अप्रैल से गांव में मौत का तांडव शुरू हुआ था। यह अब भी जारी है।

कुछ घंटों के अंतर से चल बसे थे दोनों भाई
जलालपुर गांव के रविंद्र भाटी ने बताया कि सबसे पहले अतर सिंह के बेटे पंकज की 9 मई को अचानक मौत हो गई। वह सिर्फ 24 साल का था। गांववालों के साथ बेटे को मुखाग्नि देकर अतर सिंह घर पहुंचे ही थे कि दूसरे बेटे 28 साल के दीपक की मौत हो गई।

बेटों को खोने से सदमा लगा
ग्रामीणों ने बताया कि दो बेटों की मौत के बाद अतर सिंह सदमे में चले गए थे। इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें भी कोरोना हो गया। अतर सिंह को इलाज के लिए ग्रेनो वेस्ट में प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। शनिवार रात में तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई तो घर वाले उनको नोएडा के एक हॉस्पिटल ले गए। वहां कुछ देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

अतरसिंह की पत्नी प्रेमवती का 3 साल पहले निधन हो चुका है। उनका एक बेटा दीपक डीजे का काम करता था। उसने शादी नहीं की थी। पंकज अभी कोई काम नहीं करता था। उसकी शादी हो चुकी थी और उसके दो बच्चे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। अब घर में केवल अतर सिंह का सबसे छोटा बेटा भारत और पंकज की पत्नी रह गए हैं।

गांव में 22 दिन में 25 मौतें
बताया जा रहा है कि जलालपुर गांव में 22 दिन के अंदर 25 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। गांववालों का कहना है कि गांव में इतनी मौतें ही रही हैं, लेकिन जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। केवल एक दिन कोरोना जांच के लिए कैंप लगाया। सैनिटाइजेशन भी हमने खुद करवाया। गांव में वैक्सीनेशन कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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