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कोरोना का खौफ ! श्मशान घाट से अस्थियां तक नहीं ले जा रहे लोग

नई दिल्ली : काेराेना की महामारी से लाेग सहम गए हैं। इस महामारी से मरने वाले कई लोगों को कांधा देने वाले भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में अस्थियों के विसर्जन की बात तो बहुत दूर की है। सीमापुरी के श्मशान में 300 से अधिक ऐसे लोगों की अस्थियां एक महीने में इक्कठी हो गई हैं। इनके परिजन अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को लेने के लिए नहीं आए।

सीमापुरी श्मशान के केयर टेकर जितेंंद्र सिंह शंटी ने बताया कि कोरोना की इस दूसरी लहर में 300 से अधिक अस्थियां इक्कठी हो गई हैं। कारण है कि इन दिनों ज्यादातर लोग अस्थियां लेने नहीं आ रहे हैं। जब ये स्थियां अधिक मात्रा में जुट गईं तो यह निर्णय लिया गया कि जिन लोगों का कोरोना महामारी के दौरान अंतिम संस्कार होगा, उन्हें उसी दिन अस्थियां ले जानी होंगी।

इसके बाद भी लोग रोज चार से पांच मृतकों की अस्थितयां छोड़ ही जाते हैं। इन्हें श्मशान के कर्मचारी पैकेट में रखते हैं। जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि बुधवार को सभी अस्थियों को शहीद भगत सिंह सेवा दल के वॉलंटियर्स ने उन्हें ले जाकर गांगा में प्रवाहित किया।

हाल में गुजरात सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। उसने कहा है कि श्मशान और कब्रिस्तानों में काम करने वालों को अग्रिम मोर्चे का कर्मी समझा जाएगा। गुजरात सरकार ने उन्हें सभी संबंधित लाभ देने का फैसला किया है। इन लाभों के तहत वायरस संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले कर्मियों के परिवार को 25-25 लाख रुपये दिए जाएंगे।

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