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कोरोना का असर: बच्चों में सामने आ रही ये बीमारी, जानें लक्षण

नई दिल्ली

कोरोना से रिकवर करने वाले बच्चों में अब मल्टी-सिस्टम इनफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MSI-C)अब एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में ही मल्टी-सिस्टम इनफ्लेमेटरी सिंड्रोम के 177 मामले सामने आए हैं। इनमें से भी अकेले दिल्ली में ही 109 केस हैं। राजधानी के अलावा गुड़गांव और फरीदाबाद में 68 मामले सामने आए हैं। इस बीमारी की चपेट में 6 महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चे आ रहे हैं। हालांकि, 5 से 15 साल के एज ग्रुप में इसके अधिक मामले देखने को मिले हैं।

बुखार, सांस लेने में तकलीफ हैं शुरुआती लक्षण
गंगा राम अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेन गुप्ता ने बताया कि कोरोना संक्रमण से अधिक प्रभावित बच्चों में दो तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बच्चों में निमोनिया या फिर एंडीबॉडी से संबंधित इनफ्लेमेशन (MSI-C) देखने के मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में मल्टी-सिस्टम इनफ्लेमेशन सिंड्रोम से आशय ऐसी स्थिति से है जिसमें उन्हें बुखार आता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे हार्ट, फेफड़ों और ब्रेन प्रभावित होते हैं। तीन से पांच दिनों तक बुखार, पेट में तेज दर्द, ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट और दस्त हैं

पहली लहर में आए थे करीब 2000 केस
डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से रिकवर हो चुके बच्चों के माता-पिता को अधिक सजग रहने की जरूरत है। यदि समय पर इस बीमारी का पता लग जाए तो इसका इलाज संभव है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडिएट्रिक्स इंटेंसिव केयर चैप्टर की तरफ से जारी डेटा के अनुसार कोरोना की पहली लहर में देशभर में MIS-C के दो हजार केस दर्ज किए गए थे।

पटना में बच्चों की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल
देश में बच्चों पर कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) के ट्रायल की शुरुआत हो चुकी है। पटना एम्स में 2 से 18 साल तक के बच्चों पर कोवैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, फर्स्ट फेज में 50 बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल होगा। जबकि थर्ड फेज में 550 बच्चों का लक्ष्य रखा गया है। ट्रायल में आने वाले सभी बच्चों की आरटीपीसीआर और एंटीबॉडी जांच की जाएगी

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