उत्तर प्रदेश

कोरोना : ऑक्सिजन.. बेड.. मॉर्चरी.. श्मशान.. 8 पॉइंट में समझिए वसूली का खेल

कानपुर :  उत्तर प्रदेश के कानपुर को कोरोना वायरस के संक्रमण ने ऐसे-ऐसे दिन दिखाए है, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने शहर को ऐसे जख्म दिए हैं, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। महामारी से अपनों को खोने के बाद भी लोगों का शोषण जारी है। कानपुर में लोगों को पहले संक्रमित को भर्ती कराने के लिए बेड और ऑक्सिजन के लिए संर्घष करना पड़ता है। अगर इलाज के दौरान मौत हो गई तो हैलट अस्पताल की मॉर्चरी से लेकर श्मशाम घाट तक कर्मचारी मानसिक और आर्थिक शोषण करते हैं।

संक्रमित पेशेंट की मौत हो जाने के बाद अस्पताल के कर्मचारी विद्युत शवदाह गृह तक पहुंचाने के लिए मृतक के परिजन का शोषण करते हैं। कर्मचारियों ने इसके लिए अलग से रेट भी फिक्स कर रखे हैं। कर्मचारी मृतकों के परिजन को लूटने का एक भी मौका नहीं छोड़ते हैं। मॉर्चरी से शव उठाने से लेकर, कंधा देने, फोटो खींचने, मृतक का चेहरा दिखाने, अंतिम संस्कार के लिए जल्दी नबंर लगवाने तक का पैसा वसूला जाता है।

8 पॉइंट में समझिए वसूली का खेल
जब किसी संक्रमित की मौत हो जाती है तो उसके शव को कोविड वार्ड में बनी मॉर्चरी में रखवा दिया जाता है। शव को विद्युत शवदाह में अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए कर्मचारी पहले तो शव को उठाने के लिए परिजन से पांच मास्क, पांच जोड़ी ग्लव्स और एक सेनेटाइजर की बोतल मंगाते हैं। इतनी सामग्री जो नहीं लेकर देता है, उसके शव मॉर्चरी में पड़े रहते हैं।

-हैलट के कर्मचारी मॉर्चरी से शव को ऐंबुलेंस तक ले जाने के लिए 500 रुपए की डिमांड करते हैं, जो परिजन 500 रुपए दे देते हैं, उनके शव मॉर्चरी से ऐंबुलेंस तक पहुंचा दिए जाते हैं।

सील पैक संक्रमित शव का चेहरा दिखाने के एक हजार रुपए तक की वसूली की जाती है, या फिर तीमारदारों का रहन-सहन देखकर रेट बताए जाते हैं। तीमारदारों को कोविड प्रोटोकाल का हवाला देकर डराया जाता है।

ऐंबुलेंस में एक साथ कई शव अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं। उसमें भी शव को ऊपर रखने के लिए भी वसूली की जाती है।

संक्रमित शव को सील पैक कर अंतिम संस्कार के लिए भेजा जाता है। यदि परिजन चेहरा खोलकर फोटो खींचना चाहते है, तो उसकी अलग से वसूली की जाती है।

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