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कोच अचरेकर के किस्से: उनके 13 सिक्कों ने सचिन को बनाया ‘क्रिकेट का भगवान’

टीम इंडिया के पूर्व महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के बचपन के कोच रमाकांत आचेरकर का बुधवार की शाम निधन हो गया. 87 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. बता दें कि आचेरकर ने बुधवार की शाम 6 बजकर 30 मिनट पर अपने आवास पर अंतिम सांस ली.

सचिन के बचपन के कोच रमाकांत आचेरकर का जन्म सन् 1932 में हुआ था. उन्होंने ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आचरेकर ने सिर्फ सचिन को ही नहीं बल्कि विनोद कांबली, अजित अगरकर, चंद्रकांत पंडित और प्रवीण आमरे जैसे कई दिग्गज क्रिकेटरों को निखारा है. आचरेकर के निधन की खबर सुनकर भारतीय क्रिकेट में शोक की लहर है. आइये जानते हैं कोच आचरेकर का वो किस्सा जिसने बना दी सचिन की जिंदगी.

सचिन के वो 13 सिक्के
सचिन तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में ही इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने शुरू कर दिया था. इतनी कम उम्र में डेब्यू करने के पीछे उनकी मेहनत और उनका टेलेंट तो था ही, इसके साथ ही साथ उनके कोच रमाकांत आचरेकर की मेहनत भी थी, जिसकी वजह से सचिन को आज क्रिकेट का भगवान कहा जाता है. क्रिकेट का बादशाह बनने से पहले और इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने से पहले सचिन के पास 13 सिक्के थे, जो आज भी उनके पास हैं. उन्हें ये सिक्के इनाम के तौर पर मिलते थे.

 

किसने दिए थे सचिन को ये 13 सिक्के?
सचिन स्कूल से छुट्टी होने के बाद जब रमाकांत आचरेकर की कोचिंग में दूसरे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करते थे, तो उनके कोच स्टंप पर एक सिक्का रख दिया करते थे. सचिन जब प्रैक्टिस के दौरान बल्लेबाज़ी करने आते तो आचरेकर दूसरे खिलाड़ियों को कहते कि जो खिलाड़ी सचिन का विकेट ले लेगा, ये सिक्का उसका और अगर कोई भी खिलाड़ी उन्हें आउट नहीं कर पाता था तो वो सिक्का सचिन का हो जाता था. सचिन ने उस समय ऐसे 13 सिक्के जमा किए थे और खास बात ये है कि ये सभी सिक्के आज भी उनके पास रखे हुए हैं.

सचिन को सबसे अजीज हैं ये सिक्के
एक बार एक इंटरव्यू के दौरान सचिन से पूछा गया था कि क्रिकेट से जुड़ी आपके पास सबसे यादगार चीज़ कौन सी है, जिसे आप सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं. इस सवाल का जवाब देते हुए सचिन ने कहा था कि आचरेकर सर के दिए हुए वो 13 सिक्के जिनकी वजह से मुझे सब कुछ मिला.

रमाकांत आचरेकर जितने अच्छे गुरू हैं, सचिन ने भी उतना ही अच्छा शिष्य बनकर दिखाया. रमाकांत आचरेकर ने जिस तरह से समय-समय पर तेंदुलकर का मार्गदर्शन करते हुए दुनिया के शिखर पर पहुंचाया. वहीं सचिन ने उन्हें वो सम्मान दिया जिसके वो हकदार थे. सचिन ने हमेशा अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच को दिया और यही वजह है कि वो अब भी अपने गुरू के दिए मंत्र को नहीं भूलते हैं. सचिन आज भी अपने कोच का उतना ही सम्मान करते हैं और उन्हें उनकी दी हुई सीख भी याद है.

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