क्राइम

कानपुर: 16 फर्जी ‘टिकट चेकर’ दबोचे गए, रात 10 से सुबह 6 बजे तक मन लगाकर बजाते थे ड्यूटी

कानपुर। हाथ में डायरी और पेन। गले में रेलवे का पहचान पत्र। छाती की चौड़ाहट इतनी की पीएम तक को शब्द ना मिलें। प्लेटफार्म पर आने जाने वालों में कोई छूटकर निकल नहीं पा रहा था, इनकी पैनी निगाहों से। रात दस बजे से सुबह के छह बजे तक मन लगाकर कुल 16 लोग कानपुर में रेलवे की नौकरी बजा रहे थे। इस नौकरी का जब सच खुला तो सभी के तोते उड़ गए।

बुधवार 9 जून को कानपुर रेलवे प्लेटफार्म यानी घंटाघर पर कथित रेलवे की नौकरी कर रहे कुल 16 लोगों को जब सच का सामना हुआ तो उनके पैरों तले जमीन ढ़ूंढे नहीं मिल रही थी। सभी यह जानकर दंग रह गए कि वो जिस रेलवे की नौकरी कर रहे, दरअसल वह नौकरी उनकी है ही नहीं, बल्कि उनसे 5 से 15 लाख रूपये लेकर फेक नियुक्ति पत्र चिपका दिया गया। मामला का खुलासा होने के बाद जीआरपी और आरपीएफ ने डुप्लीकेट नौकरी कर रहे 16 लोगों थाने में बिठा लिया।

इस पूरे मामले का खुलासा बुधवार की देर रात उस वक्त हुआ जब स्टेशन की प्लेटफार्म नंबर 2-3 पर टिकट निरीक्षक सुनील पासवान की नजर, गले में पहचान पत्र टांगे टिकट चेक करते एक युवक पर पड़ी। सुनील के पूछने पर उसने अपना नाम दिनेश कुमार गौतम तथा स्टाफ से होना बताया। उसने यह भी कहा कि वह ट्रेनिंग पीरियड पर है।

फर्जी टिकट चेकर दिनेश कुमार ने साथ ही यह भी बताया कि उसके साथ कई और भी लोग हैं जो स्टेशन पर प्रशिक्षण की बारीकियां सीख रहे हैं। इस पर सुनील ने बाकी साथियों को बी फोन कर बुलाने के लिए कहा। फोन करने के एक घण्टे बाद तक भी जब कोई नहीं पहुँचा तो सुनील उसे जीआरपी थाने ले गए।

जीआरपी सहित आरपीएफ ने अभियान चलाकर स्टेशन से 16 लोगों को पकड़ा और पेन-डायरी व आईकार्ड टांगे ही थाने उठा लाई। जीआरपी ने गैंग लीडर रूद्र प्रताप ठाकुर के पनकी स्थित घर पर छापा मार, लेकिन उसे पहले ही भनक लग गई और भाग गया। उसकी लग्जरी कार जब्त कर ली गई है। बताया जा रहा है कि मामले में प्रयागराज मंडल के सीनियर डीसीएम अंशू पाण्डेय ने मामले को संज्ञान में लेकर रिपोर्ट तलब कर ली है।

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