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कातिल कोरोना: श्मशान में कम पड़ने लगी लकड़ियां, खपत कम करने को ईजाद किया नया तरीका

नई दिल्ली :  अंतिम संस्कार में लगने वाले वक्त को कम करने और लकड़ियों की खपत घटाने के लिए एमसीडी तकनीक का इस्तेमाल करेगी। नई तकनीक से बनी चिताओं पर अंतिम संस्कार में समान्य चिताओं की तुलना में 75 प्रतिशत कम लकड़ियों की खपत होगी और 50 मिनट से एक घंटे का ही वक्त लगेगा। यह नई तकनीक आईआईटी एक्सपर्ट्स की मदद से लाई जा रही है।

नॉर्थ एमसीडी मेयर जय प्रकाश के अनुसार पिछले महीने अप्रैल के आखिरी दिनों में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत बढ़ गया था। श्मशानों में लकड़ियां कम पड़ गई थीं। लकड़ियों की चिताओं पर अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग टाइम भी 5 या 6 घंटे तक था। भविष्य में अंतिम संस्कार के लिए ऐसी नौबत न आए इसके लिए नॉर्थ एमसीडी के कुछ श्मशानों में नए डिजाइन और तकनीक वाली चिताएं बनाई जा रही हैं।

नए डिजाइन और तकनीक से बनी चिताओं पर अंतिम संस्कार करने से सामान्य चिताओं की तुलना में लकड़ियां 75 प्रतिशत कम लगेंगी। सामान्य चिताओं पर एक डेडबॉडी के अंतिम संस्कार में 400 किलो लकड़ी की जरूरत होती है। नई चिताओं पर सिर्फ 100 किलो ही लकड़ी लगेगी।

मेयर के अनुसार नए डिजाइन और तकनीक से बनने वाली चिताएं पचकुइयां, मंगोलपुरी और इंद्रपुरी श्मशान में बनाई जा रही हैं। प्रत्येक श्मशान में ऐसी दो-दो भट्टियां बनाई जाएंगी। इन भट्टियों में एक डेडबॉडी के अंतिम संस्कार में सिर्फ 50 मिनट से एक घंटे का वक्त लगेगा। अभी चिताओं पर डेडबॉडी के अंतिम संस्कार में कम से कम दो घंटे का वक्त लगता है।

भट्टियों का डिजाइन आईआईटी एक्सपर्ट ने तैयार किया है, जिसमें लकड़ियों का फ्लेम अधिक होता है।

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