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कांटे से कांटा निकाल रहे शिवपाल, अखिलेश अब बनाएंगे क्या प्लान?

समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद से ही शिवपाल सिंह यादव लगातार अपनी नई पार्टी के विस्तार में लगे हुए हैं. उन्होंने कांटे से कांटा निकालने की तरकीब अपनायी है. वो उन नेताओं से संपर्क साध रहे हैं जो समाजवादी पार्टी में उपेक्षा के शिकार हुए हैं. शिवपाल की कोशिशें कामयाब भी हो रही हैं और सपा के तमाम दिग्गज नेता शिवपाल के साथ आ रहे हैं.

हाल ही पूर्व राज्यसभा सांसद और सपा के दिग्गज नेताओं में से एक वीरपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया और शिवपाल के साथ हो लिए. वीरपाल सिंह को मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी लोगों में माना जाता है और पार्टी के गठन के समय से जुड़े हुए थे. उन्हें बरेली में सपा का खास चेहरा माना जाता रहा है और वे 21 सालों तक लगातार पार्टी जिलाध्यक्ष रहे. उन्होंने यह कहते हुए इस्तीफा दिया कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक गई है.

इनके बाद सपा के वरिष्ठ नेता डीपी यादव ने भी सपा का साथ छोड़ दिया है और शिवपाल के मंच पर आ गए. उनके साथ गांव के तमाम प्रधानों ने भी सेक्युलर मोर्चे की सदस्यता ग्रहण की. डीपी यादव ने कहा कि शिवपाल यादव नेता जी की नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि अखिलेश यादव की सोच अलग है.

इससे पहले शिवपाल यादव ने 30 जिला अध्यक्षों की सूची जारी की थी. इसमें ज्यादातर नाम सपा के नेताओं के ही थे. इसके अलावा वे अब सपा के तमाम मुस्लिम चेहरे अपने साथ लाने में कामयाब हुए हैं. यादव और मुस्लिम समुदाय को समाजवादी पार्टी का खास वोट बैंक माना जाता है. ऐसे में उनकी ये कोशिश सीधेतौर पर सपा के वोट बैंक में सेंधमारी के तौर पर है. लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए इसे अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

 

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