धर्म

कब और कैसे होता है भूतों का अहसास, क्या हैं इनसे बचने के उपाय?

भूत-प्रेत के होने पर विश्वास करना बहुत मुश्किल होता है। विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें कभी पारलौकिक शक्तियों का अनुभव हुआ ही नहीं और जिन्हें लगता है कि ये सब बातें सिर्फ मन बहलाने का जरिया मात्र है। लेकिन जो लोग पारलौकिक शक्तियों का अनुभव कर चुके हैं या जो इन अदृश्य शक्तियों पर विश्वास करते हैं उनका मानना है कि ईश्वर को भी किसी ने नहीं देखा लेकिन हम उस पर भी भरोसा करते हैं तो आत्माओं के होने पर संदेह क्यों?

जो लोग इन सब बातों पर भरोसा करते हैं उनके ज्ञान के लिए हम बताने जा रहे हैं कि जब भी आपको इस प्रकार के अनुभव होते हैं तो अधिकांशत: वे आत्माएं किस प्रकार की होती हैं, कैसी लगती हैं और आपको किस समय वह अपने होने का अनुभव कराती हैं। परंतु जो लोग इन पराशक्तियों के होने को केवल मात्र भ्रम मानते हैं, ये लेख उन्हें ज्ञानवर्धक लग सकता है।

आंकड़ों के अनुसार
भूत-प्रेत या परशाक्तियां कब हमें अनुभव होती हैं, इस प्रश्न के उत्तर में अधिकतर लोग यही कहते हैं की ये शक्तियां रात के अंधेरे में ही अपना अहसास करती हैं। ये इसलिए क्योंकि फिल्मों, धारावाहिकों और अन्य कहानियों में हमने ऐसा ही सुना या देखा है कि पारलौकिक शक्तियां रात के समय ही सक्रिय होती हैं, लेकिन यह सत्य नहीं है। अभी तक के आंकड़ों के अनुसार करीब 54 प्रतिशत प्रेत का अनुभव दिन के उजाले में होते हैं।

भूत-प्रेत होने के क्या लक्षण क्या हैं ?
S.S.R.F. द्वारा किए गए शोधों से ज्ञात हुआ है कि पूरे विश्व में अधिकतर घरों के स्पंदन विविध कारणों से नकारात्मक होते हैं।

घर में वस्तुओं का गायब होना और फिर पुनः मिल जाना
घर में अपरिचित या अनजान वस्तुओं का मिलना
घर के चारों ओर कोई अनाकलनीय चिह उभरना, जैसे दीवार पर खरोंच के निशान, अलमारियों अथवा दीवारों पर भयानक चेहरे, हाँथ, पैर के चिन्ह, निशान इत्यादि।
बिना किसी कारण के अजीब सी विचित्र ध्वनि या आवाज सुनाई देना अथवा दरवाजे के खुलने या बंद होने की आवाज, कुछ पीटने की, हंसने की, चलने, बोलने आदि की आवाज सुनार्इ देना।
जहां आप हैं वहां के तापमान में अनायास ही परिवर्त्तन हो जाना – 40 प्रतिशत उष्ण तापमान से 18 प्रतिशत तापमान तक ठंडा हो जाना।

.बिना किसी कारण के बत्तियों अथवा विद्युत (बिजली) के उपकरण का बार-बार जलना-बंद होना जाना या उनका काम न करना

.मोबार्इल या टेलीफोन का काम न करना

.सात्विक पौधों जैसे तुलसी आदि का मुरझा या सूख जाना

.कुत्ते अथवा बिल्ली का रोना या अकारण ही लगातार भौंकते रहना

.बिना किसी कारण के पालतू जानवर जैसे कुत्ता, बिल्ली का मर जाना

असामान्य घटनाएं
कुछ असामान्य घटनाएं जैसे कीड़े- मकोडों, खटमल, लाल चीटीयां, तिलचट्टे अथवा चूहों का अनायास ही घर में बढ़ जाना साथ ही अचानक ही बिना कारण के धार्मिक चिह्न जैसे :- ॐ, क्रोस,या 786 का घर में अचानक से उभरना
घर में अकारण अशांति तथा एक दुसरे के प्रति शत्रुता उत्पन्न होना
घर में अकारण ही बार-बार रोग या अन्य समस्याएं जैसे आर्थिक समस्या होना
अकारण घर में लगातार मृत्यु होना, बार-बार किसी की उपस्थिति अनुभव होना
कपड़ों, वस्तुओं या फर्श पर बिना किसी कारण के खून के धब्बे बन जाना
जैसे कोर्इ निगरानी कर रहा हो इस बात का अनुभव होना या वास्तव में अनिष्ट शक्ति दिखना

ये नकारात्मक स्पंदन अनिष्ट शक्तियों तथा मृत पूर्वजों को आकर्षित कर घर को भूतावेशित करते हैं। घर को आविष्ट करने वाली अनिष्ट शक्तियां तथा मृत पूर्वज घर में रहनेवालों को निरंतर कष्ट देते रहते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि हम आविष्ट घर के लक्षणों को पहचान सके जिससे समस्या को समाप्त करने का हम उपाय कर सकें। केवल संत तथा अति विकसित छठवीं इंद्रिय की क्षमतायुक्त व्यक्ति ही वास्तव में समझ सकते हैं कि कोर्इ घर आविष्ट है या नहीं। हमने घर में पराशक्तियां होने के कुछ लक्षणों को बताया है, जिससे उसमें भूत-प्रेत रहने के बारे में ध्यान दिया जा सके ताकि। समय पर सही उपचार से उसे दूर कर सकें|

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