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ओलंपिक 2020: अंग्रेजीराज में 3 गोल्ड जीता था भारत, आजादी के बाद से सिर्फ 5 बार मिला सोना

जापान की राजधानी टोक्यो में खेलों का सबसे बड़ा टूर्नामेंट ओलंपिक (Olympics) जारी है। यह खेल महाकुंभ (Tokyo Olympics) 8 अगस्त तक चलेगा। टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले ‘ओलिंपिक रिकॉल’ के जरिए हम आपको इस महाकुंभ में भारत के 121 सालों की हिस्सेदारी के अहम किस्से बता रहे हैं। भारत ने ओलंपिक (India in Olympics) में पहली बार साल 1900 में हिस्सा लिया था। तब पेरिस ओलंपिक में एक खिलाड़ी ने देश का प्रतिनिधित्व किया था। नॉर्मन प्रिचर्ड ने भारत को दो पदक दिलाए थे। हालांकि, पहली बार देश को स्वर्ण पदक साल 1928 में मिला था। हॉकी टीम (Indian hockey in Olympics) ने गोल्ड जीता था।

Tokyo Olympics: भारतीय हॉकी टीम ने नीदरलैंड को फाइनल में 3-0 हराकर देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया था। उस मैच में हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद ने दो गोल दागे थे। करीब 23 हजार लोगों ने मुकाबले को देखा था। इसके बाद देश को दूसरा स्वर्ण पदक 1932 में मिला था। अमेरिका के लांस एंजिल्स ने भारतीय हॉकी टीम ने दो मैच में दोनों जीतकर स्वर्ण पर कब्जा किया था। उस टूर्नामेंट में टीम ने कुल 35 गोल दागे थे। उसके खिलाफ सिर्फ दो गोल हुए थे। भारत ने जापान को 11-1 से हराया था। इस मैच में ध्यानचंद ने चार गोल किए थे। फिर अमेरिका को दूसरे मैच में 24-1 से भारत ने पीट दिया था। उस मुकाबले में रूप सिंह ने 10 और ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे।

Indian hockey in Olympics: भारत को ओलंपिक (Olympics) में तीसरा स्वर्ण भी हॉकी ने दिलाया था। हॉकी टीम ने तानाशाह हिटलर के देश जर्मनी में परचम लहराया था। गोल्ड मेडल के लिए हुए मुकाबले में भारत ने जर्मनी को 8-1 से पीट दिया था। ध्यानचंद ने मैच में चार गोल दागे थे। यह आजादी से पहले भारत का आखिरी गोल्ड मेडल था, क्योंकि इसके बाद ओलंपिक खेल दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1940 और 1944 में नहीं हुए थे। आजादी से पहले भारत को तीन स्वर्ण पदक मिले थे। तीनों हॉकी से आए थे। इस दौरान दो सिल्वर मिले थे जो नॉर्मन प्रिचर्ड ने जीते थे।

India in Olympics, आजादी के बाद ओलंपिक में भारत: 1947 में आजादी मिलने के बाद भारत को पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेने का मौका 1948 में मिला था। इस बार भी हॉकी टीम ने कमाल कर दिया। उसने फाइनल मैच में ब्रिटेन को रौंद दिया था। लंदन में मेजबान टीम को भारत ने वह 4-0 से हरा दिया था। हालांकि, इस बार एक कमी थी। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद टीम के साथ नहीं थे। उन्होंने प्रोफेशनल हॉकी से खुद को तब तक अलग कर लिया था।

Indian hockey in Olympics: इसके बाद आजाद भारत में दूसरा स्वर्ण 1952 में आया था। एक बार फिर से हॉकी टीम ने कमाल किया था। उसने हेलसिंकी (फिनलैंड) में यह कामयाबी हासिल की थी। फाइनल में भारत ने एक बार फिर नीदरलैंड को हराया था। हॉकी टीम वह मैच 6-1 से जीती थी। इसके बाद 1956 मेलबर्न ओलंपिक (Olympics) में भारतीय हॉकी टीम ने ऐतिहासिक मुकाबले में पाकिस्तान को 1-0 से हरा दिया था। भारतीय हॉकी टीम के स्वर्ण जीतने का सिलसिला 1960 रोम ओलंपिक में टूटा था। तब टीम को गोल्ड मेडल के लिए हुए मैच में पाकिस्तान ने 1-0 से हराया था। उसने चार साल पहले मिली हार का बदला लिया था।

India in Olympics: 1964 में एक बार फिर से हॉकी टीम गोल्ड जीतने में सफल हुई थी। यह भारत का ओलंपिक में कुल सातवां और आजादी के बाद चौथा स्वर्ण पदक था। हॉकी टीम ने टोक्यो में पाकिस्तान को एक बार फिर से 1-0 से हराकर स्वर्ण अपने नाम किया था। फिर अगले दो ओलंपिक (Olympics) 1968 और 1972 में हॉकी टीम कांस्य पदक ही जीत सकी। पहली बार 1976 में टीम को कोई पदक नहीं मिला था और वह सातवें पायदान पर रही थी। 1980 में हॉकी टीम ने एक बार फिर वापसी की और मॉस्को में स्वर्ण पदक जीता था। यह हॉकी में भारत का अंतिम पदक था। उसके बाद से अब तक सफलता नहीं मिली।

India in Olympics: हॉकी को दूर कर अन्य खेलों की बात करें तो 1980 के बाद भारत को पहला स्वर्ण 2008 में मिला था। तब शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक जीता था। वे भारत के लिए इंडिविजुल गेम में स्वर्ण पदक जीतने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं। देश को हॉकी के अलावा सिर्फ एक स्वर्ण पदक अन्य खेलों में उन्होंने ही दिलाया था। आजादी के बाद 74 साल हो गए हैं और देश को सिर्फ 5 स्वर्ण पदक मिले हैं।

इस बार टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारतीय खिलाड़ियों से एक नहीं कई स्वर्ण पदक की उम्मीदें हैं।


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