उत्तर प्रदेशक्राइम

उन्नाव में “पशु क्रूरता” की हदे पार, धड़ल्ले से जारी है “पशुओं की तस्करी”

स्लाटर हाउस तक आसानी से पहुंचते है पशु तस्कर

● पुलिस की नाक के नीचे एक्टिव है पशु तस्कर

● पशु क्रूरता से बेखबर बना है जिला प्रशासन

उन्नाव। जनपद में पशु तस्करी इस कदर बढ़ चुकी है, कि रोजाना हजारों की संख्या में स्वस्थ्य पशु जनपद के गंगाघाट की सीमा से जनपद में पर प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। परंतु इस पर प्रशासन की तरफ से कोई रोक या बंदिश नहीं लगाई जा रही। जिस कारण तस्करों को और ज्यादा प्रोत्साहन मिल रहा है। कानपुर और उन्नाव पशु तस्करों के लिए स्वर्ग बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश के बाद भी जिला प्रशासन कोई भी कार्यवाही करते नहीं दिखाई पड़ रहा है। और लोगों की माने तो पुलिस प्रशासन पशु तस्करों के ऊपर मेहरबान है।अवैध पशु तस्करी का धंधा जोरों पर है। कानपुर देहात से गंगाघाट सीमा से उन्नाव जिला में आते ही सभी जगहों पर सेटिंग के आधार पर पशु लदे वाहनों को पकड़ा नहीं जाता है। जिसमें गंगा घाट कोतवाली सीमा अधिक मेहरबान नजर आती है लॉक डाउन के समय में अन्य राहगीरों को लॉक डाउन का पाठ चेकिंग लगाकर पढ़ाया जाता है परंतु पशु तस्करी पर अंकुश लगाने में विफल नजर आ रही जनपद पुलिस, ऐसे में पशु तस्कर आराम से अपने धंधे को चला रहे हैं। वही सूत्रों की माने तो लखनऊ कानपुर राज्य मार्ग व गंगा बैराज रोड पर बेजुबानों की तस्करी का संगठित कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है, प्रतिदिन 30 से अधिक पशु लदे ट्रकों और कंटेनरों एवं छोटा हाथी वह डीसीएम को कोडवर्ड के जरिये जिले की सीमा पार करा दी जाती है। इसमें औसतन हजारों मवेशी हर रोज उन्नाव जनपद के स्लॉटर हाउस पहुंचा दिए जा रहे हैं। खास बात यह कि छोटा हाथी और डीसीएम जैसे वाहनों में भी पशुओं को बेरहमी से ठूंसकर ढोया जाता है। चौबेपुर से लेकर उन्नाव तक पशु तस्करों के लिए महत्वपूर्ण जिला बन गया है।

बड़ी संख्या में बिना मानकों के व डॉक्टरी परीक्षण के जनपद में संचालित स्लाटर हाउस तक पहुंचा दिया जाता है। सरकार की सख्ती के बाद भी प्रतिदिन दर्जनों वाहनों से अधिक वाहन पुलिस की मिलीभगत से जिले की सीमा पार करा दिए जाते हैं। लखनऊ तक काम कर रही पशु तस्करों की लॉबी ने इस कारोबार को संगठित अपराध का रूप दे दिया है। यही वजह है कि कानपुर जिले के चौबेपुर से लेकर उन्नाव जनपद के स्लाटर हाउस तक हाईवे पर पड़ने वाले कानपुर जनपद एवं उन्नाव जनपद की खाकी के कुछ जिम्मेदार उनके सिंडिकेट का हिस्सा बन गए हैं। जिनकी मदद से रास्ता साफ होने की जानकारी मिलते ही तस्कर हाईवे पर फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं। सूत्रों की माने तो लोकेशन देने के लिए तस्करों का सिंडिकेट कोडवर्ड का इस्तेमाल करता है, तस्कर गाड़ी पास कराने के लिए अक्सर भोर में चार बजे से छह बजे के बीच वा शाम तिन बजे से लेकर छह का समय चुनते हैं, हर कदम पर पैसे की खनक से प्रभावित इस कारोबार में जिम्मेदारों को भी महीना व गाड़ियों के हिसाब से पैसा दिया जाता है।

नही रोकी जाती पशु तस्करों की गाड़ियां

सूत्रों की माने तो जब किसी चौकी या थाने के बाहर चेकिंग लगी रहती है तब भी उन वाहनों को रोका तक नहीं जाता पशु तस्करों की गाड़ी को देख कर दरोगा और सिपाही अनजान बन जाते हैं और उस गाड़ी को जाने देते है।

क्या बोले पुलिस अधीक्षक

वाहनों में क्रूरता से भरे जानवरों की बात पर पुलिस अधीक्षक आनंद कुलकर्णी ने कहा कि सीओ सिटी को निर्देशित करते हुए इसकी जांच करवाई जाएगी अगर ऐसा है। तो पशु तस्करों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

-पुलिस अधीक्षक

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