उत्तर प्रदेश

उन्नाव : गंगा घाट पर शवों से कफन हटाकर फिर डाली गई रेत, नोच-नोच खा रहे कुत्ते

उन्नाव और फतेहपुर जिले के बीच गंगा की रेती में हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया है। गांवों में बीते कुछ हफ्तों में इतनी मौतें हुईं कि लोगों को शवों के दाह संस्कार का समय नहीं मिला। इसके बाद काफी तादाद में शव गंगा की रेती में दफनाए गए। कम गहराई में दबे शवों को अब कुत्ते नोच रहे हैं। गुरुवार को मौके पर पहुंचे उन्नाव और फतेहपुर जिले के अधिकारियों ने नापजोख के बाद शवों के कफन हटाकर वहां रेत डलवा दी। पैमाइश में रेती का इलाका फतेहपुर जिले का हिस्सा मिला है।

उन्नाव और फतेहपुर जिले में पिछले एक महीने में बड़े पैमाने पर लोगों की बुखार और सांस फूलने जैसी बीमारियों से मौत हुई है। गंगा किनारे दाह संस्कार के लिए बने घाटों पर जब अंतिम संस्कार के लिए ज्यादा समय लगने लगा तो रायबरेली, फतेहपुर और उन्नाव से आए शवों को बक्सर घाट से कुछ ही दूरी पर गंगा की रेती में दफना दिया गया।

ज्यादातर शव इतनी कम गहराई में दफनाए गए हैं कि कफन ऊपर ही दिख रहे हैं। कई शवों के अंगों को कुत्तों ने नोच लिया है। ये अंग कुत्ते खींचकर गांवों की तरफ ले जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पहले रोज 8-10 शवों का अंतिम संस्कार होता था, लेकिन फिलहाल रोजाना 100-150 शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। आसपास का काफी बड़ा इलाका पीपीई किट और मास्क से पटा पड़ा है।

सूचना के बाद बुधवार शाम ही उन्नाव और फतेहपुर जिले के एसडीएम और राजस्व अधिकारी मौके पर गए। पहले दोनों इलाके को दूसरे का बताते रहे। नापजोख के बाद रेती फतेहपुर की बिंदकी तहसील का हिस्सा मिली। इसके बाद मजदूर लगा शवों से कफन हटवाए और वहां मशीनों से रेत डलवाई। यहां शवों को दफनाने पर रोक लगा दी गई है। निगरानी के लिए लेखपाल को तैनात किया गया है।

इसी तरह कानपुर की बिल्हौर तहसील के खेरेश्वर गंगाघाट पर की रेती में बड़े पैमाने पर शव दफनाए गए हैं। यहां भी उन्नाव जैसा हाल है। बड़े क्षेत्र में दफनाए गए शवों के कफन साफ दिख रहे हैं। आसपास के लोग इस विषय में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। बिल्हौर की एसडीएम के सीयूजी नंबर पर तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि इसकी कोई जानकारी नहीं है। चेक कराया जाएगा।

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