/** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?> इलाहाबाद HC ने “तांडव वेब सीरीज” मामले में अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज  – JanMan tv
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इलाहाबाद HC ने “तांडव वेब सीरीज” मामले में अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज 

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजॉन प्राइम इंडिया की नेशनल हेड अपर्णा पुरोहित को बड़ा झटका लगा है। ‘तांडव’ वेब सीरीज (Tandav Web Series) को लेकर दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने अमेजॉन प्राइम की इंडिया हेड अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर्णा पुरोहित पर यूपी पुलिसकर्मियों का गलत चित्रण, हिंदू देवी-देवताओं और प्रधानमंत्री के किरदार को गलत तरह से पेश किए जाने का आरोप लगाया गया है।

पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने 20 पेज के आदेश में कहा, “ऐसे लोग बहुसंख्यक समुदाय के आराध्य देवी देवताओं को गलत तरह से दिखाकर इसके जरिए पैसा कमाना चाहते हैं और देश की उदार और सहिष्णु परंपरा का फायदा उठाना चाहते हैं।”

न्यायाधीश ने आगे कहा कि जब देश के किसी नागरिक द्वारा इस तरह के अपराध किए जाते हैं और इसे प्रदर्शन और सामाजिक विरोध का विषय बना दिया जाता है तो वो देख के हितों के लिए सक्रिय हो जाते हैं। इसके बाद वो इसे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाते हैं और आरोप लगाते हैं कि भारतीय नागरिक असहिष्णु हो गए हैं और ‘भारत’ रहने के लिए असुरक्षित जगह बन गया है।

स्टैंड-अप ‘कॉमेडियन’ मुन्नवर फारुकी, जिसे इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और शहर में एक शो के दौरान हिंदू देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, का संदर्भ देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि हिंदुओं के आराध्यों का अपमान कमाने के जरिया के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है।

वेब सीरीज के विवादित दृश्यों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा, “विवादित दृश्यों के कारण कानून व्यवस्था के लिए खतरा फैलाने वाले हैं। हिंदू देवी देवताओं के चित्रण को सही नहीं ठहराया जा सकता है। विदेशी फिल्ममेकर्स ईसा मसीह या हजरत मोहम्मद को गलत तरीके से दिखाने से बचते हैं मगर हिंदी फिल्ममेकर्स लगातार गलत तरह से हिंदू देवी-देवताओं को अभी तक दिखा रहे हैं।”

अपर्णा पुरोहित की जमानत याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद HC की एकल न्यायाधीश पीठ की टिप्पणी

जज ने इस बात को लेकर चिंता जताई कि हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने का यह ट्रेंड फिल्मों से लेकर कॉमेडी शो तक कैसे चला। आगे कहा गया है कि आवेदक (अपर्णा पुरोहित) ने सतर्कता नहीं बरती और गैर-कानूनी तरीके से उसे आपराधिक कार्यवाही के लिए विवश किया।

अदालत ने कहा, “हमें देखने में आया है कि कई फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं के नाम का उपयोग किया गया है और उन्हें गलत ढंग से दिखाया गया है जैसे ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘पीके’, ‘ओह माई गॉड’ आदि में। यही नहीं, ऐतिहासिक और पौराणिक हस्तियों की छवि भी विकृत करने के प्रयास किए गए हैं। बहुसंख्यक समुदाय की आस्था से जुड़े नामों का उपयोग पैसा कमाने के लिए किया गया है, जैसे कि ‘गोलियों की रासलीला रामलीला।” उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग की यह प्रवृत्ति बढ़ रही है और यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इसके भारतीय सामाजिक, धार्मिक और सांप्रदायिक स्थिति के लिए विध्वंसक परिणाम होंगे।

अपर्णा पुरोहित की जमानत याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद HC की एकल न्यायाधीश पीठ की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि उक्त मामलों से पता चलता है कि याचिकाकर्ता और अन्य सह आरोपितों के कृत्य से केवल एक व्यक्ति ही प्रभावित नहीं है, बल्कि देश भर में अनेक लोगों को लगता है कि यह वेब सीरीज उनकी भावना को ठेस पहुँचाती है। इसलिए आवेदक को किसी तरह की राहत देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जो फिल्म बहुसंख्यक समुदाय के मूल अधिकारों का हनन करती है उसे प्रदर्शित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है और याचिकाकर्ता के जीवन की स्वतंत्रता के मूल अधिकार को बचाव का आधार रखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है।

इस याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ ने कहा, एक तरफ तो गलत तरीके से किरदार दिखाने के कारण एक बड़े समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई गई है और दूसरी तरफ सवर्ण और दलित जातियों के बीच दूरी बढ़ाए जाने का काम किया है, जबकि राज्य की जिम्मेदारी समुदायों के बीच की दूसरी को कम कर सामाजिक, सांप्रदायिक और राजनीतिक तौर पर उन्हें एक कर देश को जोड़ने का काम करना है।”

अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अपर्णा पुरोहित की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है। इससे पहले कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखे जाने तक अपर्णा पुरोहित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

गौरतलब है कि गौतम बुद्ध नगर जिले में अपर्णा पुरोहित समेत अन्य के खिलाफ तांडव वेब सीरीज के प्रसारण के जरिए हिंदू देवी-देवताओं और हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अपर्णा पुरोहित और अन्य के खिलाफ धारा 153- A (1) (B), 295- A, 505 (1) (B), 505 (2) धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पिछले दिनों अपर्णा का बयान बंद कमरे में दर्ज किया गया। लगभग साढ़े 3 घंटे तक उनका बयान दर्ज किया गया।

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