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इमरान खान की पैंतरेबाजी नहीं आई काम, पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बरकरार

इस्लामाबाद
फाइनेंशिल ऐक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) की पेरिस में हुई ऑनलाइन बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही रखे जाने पर फिर से मुहर लग गई है। गुरुवार शाम को जारी किए गए बयान में एफएटीफ ने बताया कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद के खिलाफ 27 सूत्रीय एजेंडे में से तीन को पूरा करने में विफल रही है। एफएटीएफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

आतकवादियों के खिलाफ नहीं की कोई कार्रवाई
FATF का कहना है कि पाकिस्तान को सभी 1267 और 1373 नामित आतंकवादियों के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंधों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन करना चाहिए। एफएटीफए ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए अपनी कार्य योजना में शेष तीन बिंदुओं को लागू करने पर काम करना जारी रखना चाहिए।

जून 2021 तक ग्रे लिस्ट में ही रहेगा पाकिस्तान
एफएटीएफ ने कहा कि पाकिस्तान ने आजतक हमारे 27 कार्ययोजनाओं में से केवल 24 को ही पूरा किया है। अब इसे पूरा करने की समयसीमा खत्म हो गई है। इसलिए, एफएटीएफ जून 2021 तक पाकिस्तान से सभी कार्ययोजनाओं को पूरा करने का अनुरोध करता है।

कार्टून को लेकर पहले से ही पाकिस्तान के खिलाफ है फ्रांस
पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने एफएटीएफ को कवर करने वाले एक पत्रकार के हवाले से कुछ दिनों पहले ही कहा था कि कुछ यूरोपीय देशों, विशेष रूप से मेजबान फ्रांस ने, एफएटीएफ को पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बनाये रखने की सिफारिश की है और यह रुख अपनाया है कि इस्लामाबाद द्वारा सभी बिंदु पूरी तरह से लागू नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अन्य यूरोपीय देश भी फ्रांस का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्टून मुद्दे पर इस्लामाबाद की हालिया प्रतिक्रिया से फ्रांस खुश नहीं है।

FATF की ग्रे ल‍िस्‍ट से 38 अरब डॉलर का घाटा
पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने के कारण करीब 38 अरब डॉलर (27,52,76,18,00,000 रुपये) का नुकसान उठाना पड़ा है। आतंकवाद के वित्तीय मदद पर निगाह रखने वाली इस वैश्विक एजेंसी ने पाकिस्तान को 2008 में ही ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। इस्लामाबाद स्थित तबादलाब नाम के स्वतंत्र थिंक-टैंक ने अपने रिसर्च पेपर में दावा किया है कि पाकिस्तान को वैश्विक राजनीति की कीमत चुकानी पड़ी है। तबादलाब ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 2008 से 2019 तक पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने के कारण 38 अरब डॉलर के जीडीपी का नुकसान हुआ है। इस नुकसान का आंकलन खपत व्यय (consumption expenditures), निर्यात (exports) और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (foreign direct investment) (एफडीआई) में आई कमी के आधार पर की गई है।

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