उत्तर प्रदेशख़बर

आतंकियों से लड़ते-लड़ते शहीद हुआ यूपी का ये लाल, अधूरा रहा पत्नी से किया ये वादा

एक पिता ने अपने इकलौते पुत्र को खोया तो एक पिता अपनी होने वाली संतान का मुख तक नहीं देख सका। ऐसा हृदय विदारक दृश्य जिसने भी सुना वह सन्न रह गया। मेहनत मजदूरी करके जिस पिता ने अपने एकलौते बेटे को सेना में भर्ती कराया था। आज बेटे के इस तरह चले जाने से खुद को बेसहारा पा रहा था। पूरा गाँव आंसुओं के सैलाब में डूबा है।

यूपी के उन्नाव जिले में बीघापुर थाना क्षेत्र के गाँव रावतपुर निवासी विजय कुमार उम्र करीब 28 वर्ष पुत्र देवराज माता पिता के इकलौते पुत्र थे, जो 2011 में सेना में भर्ती होकर एसएसबी 42 बटालियन बहराइच में तैनात थे। जिनकी कंपनी जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने गई थी, जिनकी अवंतीपुरा पोस्ट जिला पुलवामा जम्मू कश्मीर में तैनाती के दौरान आतंकवादियों ने 21 अक्टूबर को उनकी पोस्ट पर हमला कर दिया। आतंकवादियों से अकेले लोहा लेते लगातार हो रही फायरिंग में विजय ने मोर्चा संभालते हुए आतँकवादियों के छक्के छुड़ा दिए। किंतु आतंकवादी की एक गोली सीधे विजय के हेल्मेट में लगी और हेल्मेट को चीरती हुयी सिर में जा घुसी। देश और अपनी पोस्ट के सभी अधिकारी कर्मचारियों की सुरक्षा करते हुए विजय शहीद हो गए।

Unnao Martyr

बटालियन से शहीद का सन्देश लेकर सैनिक अरुण सिंह सोमवार को सुबह रावतपुर पहुंचे और स्थानीय पुलिस के माध्यम से विजय के शहीद होने की खबर जैसे ही उसके घर में दी तो चारों तरफ कोहराम मच गया। पत्नी प्रतिमा देवी जो गर्भ से है, जिससे विजय ने वादा किया था कि वह 5 नवम्बर को घर आ जाएगा और संतान का मुख देख कर ही वापस जाएगा, मानो प्रतिमा जड़वत हो गई हो। उसके शरीर की सारी क्रियाएं बन्द सी हो गईं, बस शून्य आकाश को फटी आँखों से देखे जा रही थी। बताते चलें कि विजय का विवाह 3 जून 2017 में कुर्मिन खेड़ा थाना सरेनी रायबरेली में हुआ था।

वृद्ध पिता देवराज और माता कृष्णा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। विजय की 3 बहनें विजय लक्ष्मी, आरती और गुडिय़ा जो सभी विवाहित हैं अपने एकलौते भाई के खोने का गम आंसुओं से कम करने का असफल प्रयास कर रही थीं। जैसे-जैसे खबर फैली लोगों का हुजूम शहीद के घर में एकत्र होता गया। हर ओर बस यही आवाज गूंज रही थी कि देश के लाल को नमन। पिता देवराज ने कहा कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। वह अपने देश के लिए शहीद हुआ है। जम्मू कश्मीर से विजय का शव पहले बहराइच पोस्ट पर आएगा। उसके बाद सैनिकों की देखरेख में शव गृह जनपद लाया जाएगा।

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