उत्तर प्रदेश

अब संदिग्ध मौतों के राज सुलझाएगी फॉरेंसिक लैब, जनवरी 2021 से अप्रैल तक के भेजे गए नमूने

उत्तर प्रदेश की हाईटेक लैब्स में एक झांसी की लैब में अब प्रयागराज और कानपुर जोन के विसरा जांच और बैलिस्टिक परीक्षण होगा। इसके लिए अब तक महीनों इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब ये नमूना लैब में पहुंचने के बाद जांच में कम समय लगेगा। विसरा रिपोर्ट की वजह से बहुत से मामलों में न्याय नहीं मिल पाता था। इस लैब के बनने से इस तरह की परेशानी दूर हो जाएगी।

विसरा जांच से आरोपियों को मिल जाता है फायदा
किसी भी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके बाद मौत की वजह को पता लगाने के लिए मृतक के शरीर के कुछ आंतरिक अंगों जैसे फेफड़ा, आंत, किडनी, ब्रेन, लीवर और ब्लड के सैंपल को सुरक्षित रख दिया जाता है। विसरा सैंपल की जांच फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में ही होती है। अभी तक विसरा जांच के लिए आगरा और लखनऊ की प्रयोगशाला में भेजी जाती थी। जहां बेहतर रखरखाव न होने की वजह से सैंपल नष्ट हो जाता था और आरोपियों को फायदा मिल जाता था।

आगरा की लैब है देश की बड़ी लैब
आगरा फोरेंसिक लैब की गिनती प्रदेश की सबसे पुरानी प्रयोगशाला में होती है. यहां सीरोलाजी, विसरा, विस्फोटक, कंप्यूटर, डीएनए, बैलेस्टिक, डाक्यूमेंट, साइबर क्राइम समेत एक दर्जन से ज्यादा सेक्शन हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा कानपुर समेत अन्य जिलों के बैलेस्टिक केसों की जांच भी आगरा लैब में होती थी। इसके अलावा लखनऊ में भी ये सुविधा हैं। केसों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रदेश की अधिकांश लैब में सेक्शन बढ़ाए जा रहे हैं।

गाजियाबाद में एक मई से बैलेस्टिक सेक्शन और झांसी में 15 मई से सीरोलाजी लैब शुरू हो चुकी है। लखनऊ फोरेंसिक लैब के डा. एके मित्तल ने बताया कि बैलेस्टिक और विसरा के मामलों के नमूने 25 मई से झांसी फोरेंसिक लैब में लिए जाएंगे। इससे केसों के निस्तारण में तेजी आएगी।

इन जिलों में पहले से काम कर रही है लैब

वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और आगरा में लैब पहले से काम कर रही हैं। इनमें आगरा, मुरादाबाद, लखनऊ और गोरखपुर की लैब बड़ी हैं। जिसमें सारी जांचें होती थी। जबकि अन्य मामूली जांचों के लिए बाकी लैब में नमूने भेजे जाते थे।

जनवरी 2021 से अप्रैल 2021 तक भेजे गए नमूने

(पोस्टमार्टम हाउस के रिकॉर्ड के मुताबिक)

  • जनवरी 2021 में 9 नमूने भेजे गए
  • फरवरी 2021 में 7 नमूने भेजे गए
  • मार्च 2021 में 13 नमूने भेजे गए
  • अप्रैल 2021 में 11 नमूने भेजे गए
  • इससे पहले 2020 के 49 मामलों में रिपोर्ट नहीं आई है। जबकि 29 मामलों की विसरा रिपोर्ट कई बार रिमाइंडर भेजने पर आई है।

विसरा रिपोर्ट की बजह से आज भी फंसे मसले

1 मामला : शहर के चर्चित आरजू हत्याकांड में जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट की वजह से मामला उलझ गया था। उस समय पहले से सेफ करके रखा गया विसरा जांच के लिए भेजा गया है। सीओ नजीराबाद संतोष कुमार सिंह ने इस मामले में पार्ट चार्जशीट लगाकर आरोपियों को जेल तो भेज दिया लेकिन चार्जशीट में विसरा रिपोर्ट न आने तक आरोपियों पर आरोप सिद्ध न हो सके। विसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।

2 मामला : स्वरूप नगर में तीन मजिल की इमारत से गिरकर पेंट कारोबारी की बेटी की ससुराल में मौत हो गई थी। शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं थे। मौत की वजह साफ न हुई तो विसरा जांच के लिए भेजा गया। इस मामले में भी विसरा की रिपोर्ट अभी तक नही आई है।

Back to top button