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अब गांवों में डेरा डाल दिया कोरोना, देखें अपने-अपने राज्य का डरावना आंकड़ा

देश में रोजाना नए कोरोना केस की संख्या घटने लगी है। इसका मुख्य कारण बड़े शहरों में इसकी रफ्तार धीमी पड़ना है। जिलावार आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर राज्यों में अब शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि गांवों में अपेक्षित स्तर पर कोरोना टेस्ट हो ही नहीं रहे हैं। इस कारण कई पॉजिटिव केस सरकारी आंकड़ों में शामिल ही नहीं हो पा रहे। चूंकि ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा व्यवस्था भी लगभग चौपट है, इसलिए वहां दम तोड़ने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।

इन 13 राज्यों में ग्रामीण इलाकों से आ रहे ज्यादा केस
जिन 24 राज्यों में जिलों को ग्रामीण और शहरी आधार पर अलग किया जा सकता है, उनमें 13 राज्य ऐसे हैं जहां बड़े शहरों के मुकाबले कस्बों और देहातों से ज्यादा कोरोना केस सामने आ रहे हैं। जब से कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर चली तब से लगभग सभी राज्यों से आने वाले कोरोना केस में ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

डेली कोरोना केस का अध्ययन करने पर पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज है। इसका कारण यह है कि शहरों में अब केस कम हो रहे हैं जबकि गांवों में अब भी बढ़ रहे हैं। मसलन, बिहार के शहरी क्षेत्र में डेली कोरोना केस का पीक 3,482 था जबकि ग्रामीण क्षेत्र का यह आंकड़ा 10,710 रहा। 9 अप्रैल को यहां कुल कोरोना केस में ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी 53% थी जो 9 मई को बढ़कर 76% हो गई। नीचे के ग्राफ में ऐसे ही अन्य 12 राज्यों के आंकड़े दिए गए हैं…

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ध्यान रहे कि असम, तेलंगाना, गोवा, मणिपुर और सिक्किम के पास जिलास्तरीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं जबकि जम्मू-कश्मीर छोड़कर किसी केंद्रशासित प्रदेश को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है।

देश के 11 ऐसे राज्य हैं जहां अब भी हर दिन शहरों से ज्यादा केस आ रहे हैं, लेकिन अप्रैल से यहां के ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। ये वैसे राज्य हैं जहां कोरोना केस में ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों की हिस्सेदारी ज्यादा है। मसलन, पंजाब में 9 अप्रैल को कुल कोरोना केस में गांवों की हिस्सेदारी 40% थी जो 9 मई को बढ़कर 49% हो गई। फिर भी ध्यान रखना होगा कि यहां गांवों के मुकाबले शहरों से अब भी ज्यादा केस आ रहे हैं।

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गांवों में ज्यादातर वही लोग टेस्ट करवा रहे हैं जिनमें कोरोना के गंभीर लक्षण दिख रहे हैं। सामान्य लक्षण वाले ज्यादातर लोग जांच ही नहीं करवा रहे। दुनियाभर में पॉजिटिविटी रेट 5% से नीचे रखने की जद्दोजहद रहती है, लेकिन पुडुचेरी के यमन जिले में यह करीब-करीब 100% है। पिछले हफ्ते 17 जिलों में 48% टेस्ट पॉजिटिविटी पाई गई। इनमें नूह, कालाहांडी, लाहौल स्पीति, राजसमंद जैसे जिले शामिल हैं जो बड़े शहर नहीं बल्कि कस्बे हैं।

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