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अच्छी तस्वीर: तेरहवीं पर नहीं बुलाये रिश्तेदार, अपने बूते अस्पताल शुरू कर ठीक किये 42 मरीज

गांवों में कोरोना काे लेकर अंधविश्वास, अफवाहों और लापरवाही के मामलों में बीच अच्छी तस्वीर भी देखने को मिल रही है। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के गांवों में लोगों ने डिस्टेंसिंग का अनुशासन बनाए रखा है। लोग रिश्तेदारों को बुलाने से बच रहे हैं। अपने बूते अस्पताल खोल रहे हैं।  

सबसे ज्यादा पॉजिटिव मरीजों वाले गांव में युवाओं ने संभाली कमान
रतलाम जिले के जिन गांवों में 7 दिन पहले तक मौतों से दहशत थी, वहां अब लोगों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। वे अब सरकार के भरोसे नहीं हैं। जावरा क्षेत्र के सबसे संक्रमित गांव रियावन में अब तक 50 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन किसी ने भी तेरहवीं के कार्यक्रम में रिश्तेदारों को नहीं बुलाया। स्थिति बेकाबू होने लगी तो गांव के युवाओं ने जन सहयोग से गांव के बाहर अस्पताल शुरू कर दिया।

अस्पताल के लिए बिल्डिंग एक प्राइवेट स्कूल ने दी। पलंग, बिस्तर और फर्नीचर टेंट वाले ने मुफ्त में मुहैया कराए। बाकी सामान गांव के लोगों ने अपने घरों से जुटाया। गांव वालों की पहल के बाद प्रशासन ने एक नर्स की ड्यूटी लगाई। दो सरकारी डॉक्टर रोज सुबह-शाम मरीजों को देखने आते हैं।

यहां 14 मरीज भर्ती हैं। नर्स सुनीता धाकड़ कहती हैं कि 50 बेड का यह अस्पताल 4 मई से शुरू किया था। अब तक 42 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। गांव के युवा प्रकाश टेलर और पंकज धाकड़ बताते हैं कि अस्पताल का खर्च गांव के लोग चंदा देकर उठा रहे हैं। मरीजों के लिए दूध-फल और खाना गांव के घर-घर से आ रहा है। 35 युवा यहां दिन-रात इंतजाम जुटा रहे हैं। गंभीर मरीज को शहर तक भेजने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी है, लेकिन अब तक इसकी जरूरत नहीं पड़ी।

संक्रमित घर से कोई बाहर न निकले, इसलिए सरपंच खुद कर रहे मॉनिटरिंग
रियावन से 6 किमी दूर चिपिया गांव में अब तक 13 पॉजिटिव मिल चुके हैं। यहां कुल 4 मौतें हुईं। इनमें से 2 मौतें कोरोना से बताई जा रही है। गांव में संक्रमण रोकने के लिए युवाओं की टीम काम कर रही है। चौराहे पर हरिओम पाटीदार बैठे थे। बोले- सामने जो मकान है, उसमें पॉजिटिव मिले हैं। इस परिवार के लोगों को होम क्वारेंटाइन किया है। कोई भी बाहर न निकले, इसलिए हम लोग 16 घंटे रोज यहीं तैनात रहते हैं।

सरपंच धन्नालाल मालवीय कहते हैं कि गांव के लड़के खुद इस काम के लिए आगे आए हैं। मैं लगातार इनके संपर्क में रहता हूं। लोगों को तुलसी, लौंग, काली मिर्च मिलाकर लेने की सलाह भी दे रहे हैं, ताकि कोरोना से बचे रहें।

गांव में रिश्तेदारों का भी प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया
1680 की आबादी वाले नवेली गांव में अब तक 19 पॉजिटिव मिल चुके हैं। मरीजों के मिलते ही गांव के युवा सक्रिय हो गए। तत्काल इलाज शुरू करा दिया, इसलिए इस गांव में कोरोना से अब तक किसी की मौत नहीं हुई।

दोपहर 3 बजे सहायक सचिव अंतर सिंह डोडिया प्रवेश मार्ग पर नाकाबंदी के दौरान तैनात मिले। बोले- गांव में प्रवेश के तीन रास्ते हैं, तीनों को बंद कर दिया है। बाहरी व्यक्ति का गांव में प्रवेश प्रतिबंधित है। यहां तक कि गांव वालों ने अपने रिश्तेदारों को फोन कर मिलने आने से रोक दिया है।

गांव के दूसरे रास्ते पर नाकाबंदी में तैनात भेरूलाल डागर कहते हैं कि हम चार युवक हैं, जो सुबह 6 से रात 8 बजे तक यहां तैनात रहते हैं। सरपंच धापू बाई बताती हैं कि इस नाकाबंदी से गांव में संक्रमण रुका है। जो लोग पॉजिटिव हैं, उनमें भी सुधार है, वे जल्द ठीक हो जाएंगे।

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