उत्तर प्रदेशख़बर

अखिलेश ने बनाया मास्टर-प्लान, इसी से करेंगे भाजपा का काम तमाम

लोकसभा चुनाव में चंद ही महीने रह गए हैं. ऐसे में पीएम मोदी को यूपी में रोकने के लिए बन रहे सपा-बसपा और दूसरी छोटी पार्टियों के महागठबंधन को अमली जामा पहनाने की कोशिशें बेहद तेज हो गई हैं. सूत्र बताते हैं कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के इस गठबंधन में यूपी की 80 लोकसभा सीटों के बंटवारे की रूपरेखा भी करीब-करीब तय हो गई है. फिर भी मायावती को जानने वाले ये बात समझते हैं कि वो कब पलट जाएं, इसका कोई भरोसा नहीं. यही कारण है कि महाठबंधन पर बनी अनिश्चितता के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने संगठन को मजबूत बनाने के साथ ही जनता के दिल में उतरने का प्रयास तेज कर दी है.

लोकसभा चुनाव करीब आ चुका है. आयोग ने अपने स्तर पर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. राजनीतिक दल भी पूरी ताकत से तैयारी में जुटे है. सपा और बसपा गठबंधन के जरिये मैदान में उतरना चाहती है लेकिन अभी सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंसी है. सपा और बसपा के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि वे केंद्र में सरकार नहीं बना सकते लेकिन सत्ता में भागीदारी हासिल कर सकते हैं. यह तभी संभव है जब उन्हें अधिक सीटें मिलें. कम सीट मिलने की स्थित में उनकी हालत राजस्थान और मध्य प्रदेश वाली हो जाएगी. जहां उन्हें कांग्रेस को बिना मांगे समर्थन तो दे दिया लेकिन कांग्रेस ने उन्हें सत्ता में भागीदारी नहीं दी. इससे सपा में बेचैनी साफ दिख रही है. पूर्व सीएम अखिलेश यादव अपनी बेचनी को बयां भी कर चुके हैं.

यही वजह है कि अब सपा नए प्लान के साथ मैदान में उतर रही है. वह किसी भी हालत में वर्ष 2019 में केंद्र में किंग मेकर बनना चाहती है. इसके लिए प्रदेश नेतृत्व खास अभियान चलाने जा रहा है. सभी जिलों को 14 दिवसीय अभियान शुरू करने के निर्देश दिये गए है. इस अभियान के तहत पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व प्रत्याशी व पदाधिकारी पिछड़े वर्ग के लोगों के बीच गॉव-गॉव जाकर भाजपा की देश व प्रदेश की सरकारों द्वारा किसान, मजदूर, गरीब की हो रही उपेक्षा व चुनाव के दौरान किये गये वादों को पूरा न करने की पोल खोलने का काम करेंगे.

14 दिवसीय यह कार्यक्रम 7 जनवरी को शुरू होगा और 20 जनवरी तक चलेगा. इसके तहत पार्टी के पदाधिकारी, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक सभी गांवों में जाएंगे और रोजगार, मंहगाई, प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 हजार रूपये जमा करने, नौकरियों में सवर्णो को प्राथमिकता जैसे मुद्दे ग्रामीणों बीच उठाकर बीजेपी सरकार की पोल खोलेंगे. इस दौरान लोगों को पार्टी से जोड़कर अधिक से अधिक लोकसभा सीट जीतने की कोशिश करेंगे. ताकि केंद्र में अगर विपक्ष की सरकार बने तो उसमें सपा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो. यानि वह किंग मेकर के रूप में सामने आ सके.

 

 

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