उत्तर प्रदेश

योगी सरकार से इन 4 चेहरों का पत्ता हुआ साफ, जानिए क्यों गिरी ये गाज ?

योगी सरकार ने पहले मंत्रिमंडल के विस्तार के जरिए 2022 के विधानसभा चुनाव के समीकरण साधने की कवायद की जा रही है. मंगलवार को योगी कैबिनेट के चार मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया गया है. इन मंत्रियों की छुट्टी के पीछे उनका परफॉर्मेंस मुख्य वजह बनी. मुख्यमंत्री ने चार मंत्रियों के इस्तीफे लेकर अपनी सरकार में सुचिता व पारदर्शिता की राह चलने का साफ संदेश दिया है. यह भी काफी हद तक साफ करने की कोशिश की है कि सरकार की छवि को लेकर वह कोई भी समझौता नहीं करेंगे. कहना गलत न होगा कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस का संदेश दिए जाने के बावजूद उनकी सरकार के कुछ मंत्री उनकी मंशा को सही से समझ नहीं सके. नतीजतन, उन्हें कैबिनेट की कुर्सी गंवानी पड़ी सियासी तौर पर अब उन्हें अपने क्षेत्र में दुश्वारियां झेलनी पड़ सकती हैं सो अलग.

अनुपमा जायसवाल

योगी सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो गई है. अनुपमा बेसिक शिक्षा अधिकारियों के तबादलों के साथ छात्रों के जूते-मोजे, स्वेटर और पाठ्य पुस्तकों के टेंडर को लेकर विवाद में रहीं. पिछले साल विभाग में बच्चों को फरवरी तक स्वेटर वितरित नहीं हुए थे. इसके अलावा छात्रों के जूते-मोजे के वितरण में देरी से सरकार की काफी किरकिरी हुई थी. अनुपमा के कार्यकाल में हुई 68,500 शिक्षकों की भर्ती में भी अनियमितताओं की शिकायतें आई हैं. यह भर्ती अभी तक उच्च न्यायालय में विचाराधीन है. इसके इलावा अलावा एक स्टिंग ऑपरेशन में अनुपमा के दफ्तर का भी नाम सामने आया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने अनुपमा के दफ्तर में कार्यरत निजी सचिव को हटा दिया था.

धर्मपाल सिंह

बीजेपी के दिग्गज नेता और सिंचाई मंत्री रहे धर्मपाल सिंह पर भी गाज गिरी है. धर्मपाल सिंह ने मंगलवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. सिंचाई विभाग में तबादलों में हुई गड़बड़ी और बढ़ती कमीशनखोरी की शिकायतें मिलने के बाद मंत्रिमंडल से उनकी छुट्टी हुई है. विभाग में कमीशनखोरी और दलालों का सक्रिय होना भी धर्मपाल सिंह को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की मुख्य वजह बनी.

राजेश अग्रवाल

योगी सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे राजेश अग्रवाल की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो गई है. राजेश अग्रवाल और अपर मुख्य सचिव के बीच शुरू से ही तालमेल नहीं बैठ पा रहा था. अग्रवाल ने जिनके तबादले किए थे, अपर मुख्य सचिव ने उन फाइलों को मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया था. इसके बाद वहां से नीति के अनुरूप प्रस्ताव बनाकर देने के लिए कहा गया तो स्पष्ट हो गया कि अग्रवाल के लिए सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को यहां तक लिखा था कि अपर मुख्य सचिव उन्हें बिना दिखाए फाइलें सीधे सीएम आफिस भेज रहे हैं. हालांकि वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल के इस्तीफे की वजह उनकी उम्र 75 वर्ष हो जाना बताया जा रहा है.

अर्चना पांडेय

भूतत्व एवं खनिकर्म राज्यमंत्री अर्चना पांडेय की योगी कैबिनेट से छुट्टी हो गई है. एक स्टिंग ऑपरेशन में अर्चना पांडेय के निजी सचिव पर पैसा लेकर काम कराने का आरोप लगा था. इसके बाद निजी सचिव को हटा दिया गया था. इसके अलावा सरकार और संगठन के कामकाज में निष्क्रियता का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है.

कुलमिलाकर योगी मंत्रिमंडल में फेर बदल कर बीजेपी यूपी में अपना घर मज़बूत बनाए रखना चाहती है. सारा फ़ोकस सामाजिक समीकरण पर है. इसी समीकरण से तो बीजेपी ने मायावती और अखिलेश यादव के गठबंधन को पिछले चुनाव में धूल चटा दी थी. इसके साथ ही योगी ने यह भी सन्देश भी दिया कि परफॉर्मेंस से समझौता नहीं किया जा सकता.

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