माया के दिल से उतरा अखिलेश का साथ, गठबंधन अब चंद दिनों की बात ?

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महागठबंधन पर क्या बोलीं मायावती
लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सपा से जुड़े सूत्रों की माने तो पार्टी प्रदेश अध्यक्ष समेत संगठन के कई पदाधिकारियों को बदल सकती है। चुनाव में मिली करारी हार के बाद सपा में मंथन का दौर जारी है।
वाही चुनाव में हार के बाद  अपनी अगली रणनीति की तैयारियों में मायवती जुट गई हैं। बताते चले यूपी में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बना सपा-बसपा और आरएलडी का महागठबंधन भाजपा की आंधी में बिखर गया और 80 में से महज 15 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाया। महागठबंधन में शामिल चौधरी अजीत सिंह की पार्टी RLD (राष्ट्रीय लोकदल) का इस लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खुल पाया। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती को 10 और अखिलेश यादव की सपा को केवल 5 सीटो पर ही सिमट गयी। इस चुनाव में करारी हार के बाद मायावती ने मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई और उनके सामने अपनी नई रणनीति का खुलासा किया। इस दौरान मायावती ने यूपी में बने महागठबंधन को लेकर भी बड़ा बयान दिया।
यूपी में सपा-बसपा-राष्ट्रीय लोकदल के महागठबंधन बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में पार्टी के सभी नवनिर्वाचित सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक की। इस बैठक में मायावती ने यूपी की नगीना सीट से जीते सांसद गिरीश चंद्र जाटव को पार्टी के संसदीय बोर्ड का नेता और जौनपुर सीट से जीते श्याम सिंह यादव को उपनेता नियुक्त किया। इनके अलावा जेडीएस छोड़कर बसपा में शामिल हुए और यूपी की अमरोहा सीट से चुनाव जीते दानिश अली को संसदीय बोर्ड में मुख्य कॉर्डिनेटर के तौर पर नियुक्त किया गया। इस दौरान मायावती ने यूपी में महागठबंधन को लेकर अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि प्रदेश में यह गठबंधन जारी रहेगा। साथ ही मायावती ने अपनी नई रणनीति का ऐलान करते हुए कहा कि वो 2019 के चुनाव नतीजों को लेकर हर लोकसभा सीट का गहराई से मूल्यांकन करेंगी।
मिली जानकारी के मुताबिक बताते चले बसपा पार्टी पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चुनाव के नतीजों के बाद मायावती गठबंधन की हर सीट पर सहयोगी दलों के बीच आपसी वोट ट्रांसफर को लेकर भी एक खास रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसके लिए वो सीटवार चुनाव नतीजों का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बने महागठबंधन के तहत बसपा 38 सीटों पर, सपा 37 सीटों पर और आरएलडी 3 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। अमेठी और रायबरेली दो सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ा गया था, जहां महागठबंधन ने अपने प्रत्याशी खड़े नहीं किए थे। हालांकि कांग्रेस केवल एक ही सीट रायबरेली पर जीत दर्ज कर पाई, जहां से सोनिया गांधी चुनाव जीतीं। अमेठी सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा।