चाचा-भतीजे की जोड़ी आने वाली है साथ, सपा ने ऐसा ही दिया है संकेत

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लखनऊ. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सुप्रीमो शिवपाल यादव के बीच तल्खियां कुछ कम होती नजर आ रही हैं। विधानसभा चुनाव 2017 से पूर्व दोनों के बीच आई खटास समाजवादी पार्टी के इस कदम के बाद मिठास में बदल सकती है। अब शिवपाल की विधानसभा सदस्यता रद नहीं होगी, क्योंकि समाजवादी पार्टी ने सदस्यता रद करने की याचिका वापस लेने का फैसला किया है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष को खत लिख दिया है। अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के विधानसभा चुनाव 2022 में साथ आने के आसार बनते दिख रहे हैं।

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के मुखिया शिवपाल यादव और समाजवादी पार्टी के एमएलए बने रहेंगे। शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी से जसवंतनगर के विधायक हैं। शिवपाल यादव की विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की याचिका वापस लेने के लिए सपा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख दिया है। सपा मुखिया का यह कदम शिवपाल यादव की समाजवादी पार्टी में दोबारा इस्तकबाल करने का रास्ता साफ कर रहा है। होली के त्यौहार ने चाचा भतीजे के बीच एक दूसरे को करीब लाने का काम किया। सैफई में आयोजित कार्यक्रम में एक मंच पर दोनों साथ-साथ बैठे और अखिलेश ने शिवपाल के पैर भी छुए।

दरअसल, विधानसभा चुनाव 2017 से पहले ही चाचा-भतीजे शिवपाल यादव व अखिलेश यादव के बीच मनमुटाव हो गया। यह मनमुटाव इतना बढ़ा कि दोनों ने एक दूसरे से किनारा कर लिया। शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) नाम से अपनी एक नई पार्टी बना ली थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने शिवपाल यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सितंबर 2019 में सपा ने शिवपाल की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल की थी। तब से यह याचिका विचाराधीन है।

नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने इस याचिका को वापस करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें लिखा है कि आपके सम्मुख जो याचिका विचाराधीन है, उसमें पूरे प्रपत्र नहीं लगे हैं। सदस्यता रद करने के लिए जो जरूरी प्रपत्र होते हैं, उसे हम आपके समक्ष प्रस्तुत भी नहीं कर सके हैं। इस कारण आपको निर्णय लेने में भी असुविधा हो रही है। इसलिए इस याचिका को वापस कर दिया जाए। नेता प्रतिपक्ष गोविंद चौधरी कहते हैं कि अभी याचिका वापस लेने के लिए पत्र लिखा गया है। बाद में इसे दोबारा लगाया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ह्दय नारायण दीक्षित ने बताया कि उनके ऑफिस में याचिका वापस करने का पत्र मिल गया है। फिलहाल विधानसभा सचिवालय बंद चल रहा है। इसका परीक्षण कराया जाएगा और जो भी विधि व संविधान सम्मत होगा वह निर्णय लिया जाएगा।

शिवपाल यादव पहले ही सपा से गठबंधन करने व अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं पर अपनी पार्टी प्रसपा का सपा में विलय करेंगे या नहीं यह सवाल अभी भी बरकरार है। शिवपाल ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा में रहते हुए जसवंतनगर से विधानसभा का चुनाव जीता था लेकिन बाद में उन्होंने सपा छोड़कर अलग पार्टी बना ली। इस पार्टी के जरिए प्रसपा 50 से ज्यादा सीटें लड़ी लेकिन एक पर भी कामयाबी नहीं मिली। जबकि सपा-बसपा से गठजोड़ कर केवल पांच ही सीट जीत पाई। अब 2022 के चुनाव में अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के साथ आने के आसार बन रहे हैं।