धर्म

बड़ा खुलासा: मंगलवार को क्यों नहीं खाना चाहिए मांस, ये है असली वजह

भारत में रहने वाले अधिकतर लोग दो प्रकार की डाईट फॉलो करते हैं. पहला शाकाहरी और दूसरा मांसाहारी. जहाँ एक तरफ कुछ जगहों पर हिन्दुओं को शुद्ध शाकाहरी रहने की सलाह दी जाती हैं तो वहीँ कुछ लोग हिन्दू घर्म के होने के बावजूद मांस खाना पसंद करते हैं. आप ने कई बार देखा होगा कि घर में बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि आज मंगलवार हैं मांस मच्छी मत खाना. ऐसे में हम इस नियम को मान तो लेते हैं. लेकिन इसके पीछे की वजह किसी को पाता नहीं होती हैं. कई बार शाकाहारी लोगो के मन में भी सवाल उठता हैं कि ये माँसाहारी लोग रोज दबा के मांस खाते हैं लेकिन मंगलवार के दिन इसका परहेज क्यों करते हैं? आज हम इसी सवाल का जवाब विस्तार से देंगे…

दरअसल हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हफ्ते का हर दिन किसी ना किसी देवी देवता को समर्पित होता हैं. इसी कड़ी में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता हैं. इस दिन हम सभी हनुमान जी की पूजा पाठ करते हैं. हनुमान जी राम भगवान के परम भक्त थे. ऐसा कहा जाता हैं कि जो व्यक्ति राम का नाम लेता हैं समझो उसने हनुमान का नाम भी ले लिया. हनुमान जी को दुःख और कष्टों को हरने वाले भगवान के रूप में जाना जाता हैं. हनुमान जी एक वानर होने के नाते शुद्ध शाकाहारी थे. इसलिए उनके सम्मान में मंगलवार के दिन मांस खाना वर्जित रखा जाता हैं. मंगलवार के अलावा गुरुवार और शनिवार को भी एक पवित्र दिन माना जाता हैं. इन दिनों में भी कई लोग मांस खाने से परहेज करते हैं.

मंगलवार के दिन मांस ना खाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित हैं. दरअसल प्राचीन समय में ब्राह्मण चाहते थे कि समस्त हिन्दू धर्म शुद्ध शाकाहारी चीजो का ही सेवन करे. मांस को कोई छुए तक नही. लेकिन दूसरी जाती के लोगो को ये बात मंजूर नहीं थी. इस पर एक विद्वान ब्राह्मण ने लोगो को इकठ्ठा कर देवी देवताओं की कई पौराणिक कहानियां सुनाई और लोगो को बताया कि किस तरह भगवान को मांस खाने वाले लोग पसंद नहीं हैं. इस कथा में हनुमान जी का एक विशेष उल्लेख था. कथा सुनने के बाद लोगो ने रोज मांस ना खाने की सलाह तो नहीं मानी लेकिन वो मंगलवार के दिन हनुमान जी के सम्मान में मांस ना खाने के लिए मान गए.

एक अन्य कथा के अनुसार लोग अपनी मांस खाने की लत पर नियंत्रण रखना चाहते थे. वे इतने भी बेरहम नहीं बनना चाहते थे कि रोजाना खाने के लिए जानवरों का क़त्ल करना परे. इसलिए उन्होंने आपस में मिलकर मंगलवार, गुरुवार और शनिवार के पवित्र दिन मांस ना खाने का फैसला लिया. बस तभी से ये परम्परा चली आ रही हैं.

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