जिस रोजगार योजना को सरकार बताई गेमचेंजर, उसमें नौकरियां हुईं आधी

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केंद्र की मोदी सरकार भले ही बढ़ती बेरोज़गारी के दावों को नकारती रही हो, लेकिन समय-समय पर जारी होने वाले आंकड़े सरकार की कलई खोलते रहे हैं। इस बार सरकार की पोल किसी और ने नहीं बल्कि उसी के मंत्रालय से जारी होने वाले आंकड़े ने खोली है।

दरअसल, श्रम एवं रोज़गार मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में रोज़गार को लेकर एक महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया है। आंकड़े के मुताबिक, मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस साल आधे से भी कम रोज़गार के अवसर सृजित हो सके हैं।

सरकारी आंकड़े के मुताबिक, पीएमईजीपी के तहत मौजूदा वित्त वर्ष (2019-20) में 31 अक्टूबर तक देशभर में सिर्फ 2,11,840 लोगों को ही नौकरी मिल पाई है। इससे पहले वित्त वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय स्तर पर 5.87 लाख रोज़गार के अवसर पैदा हुए थे।

बता दें कि प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की स्वरोज़गार योजना है। पीएमईजीपी के तहत उद्योग लगाने पर 25 लाख और सेवा क्षेत्र में निवेश करने पर 10 लाख रुपये कर्ज मिलता है। पीएमईजीपी के तहत लोन लेने पर सामान्य जाति के आवेदकों को लोन की रकम पर 15 प्रतिशत सब्सिडी और आरक्षित जाति के आवेदकों को 25 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। ग्रामीण इलाके में उद्योग लगाने पर सब्सिडी की यह रकम बढ़कर 25-35 फीसदी हो जाती है।

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दिलचस्प बात तो ये है कि पीएमईजीपी के तहत रोज़गार न पाने के मामले में जिन राज्यों की स्थिति सबसे खराब है उनमें पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात भी शामिल है। गुजरात के साथ ही त्रिपुरा, केरल, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना भी खराब स्थिति वाले राज्यों में है।

पीएमईजीपी का प्रदर्शन त्रिपुरा में सबसे ज़्यादा खराब रहा। यहां इस योजना के तहत एक भी व्यक्ति को नौकरी नहीं मिल सकी। वहीं, केरल में इस योजना के तहत सिर्फ 72, जम्मू-कश्मीर में 216, गुजरात में 264, तेलंगाना में 256, राजस्थान में 312 और दिल्ली में कुल 368 लोगों को ही नौकरी मिल सकी।

इसी तरह पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और लक्षद्वीप की बात करें तो यहां भी हालात कुछ अच्छे नहीं दिखे। इन राज्यों में भी पीएमईजीपी के तहत नौकरी पाने वालों की संख्या 500 से 2000 के अंदर ही रही।

गौरतलब है कि इस साल जून में सरकार ने बेरोज़गारी से जुड़े आंकड़ों को जारी किया था। उससे पता चला था कि देश में 2017-18 में बेरोज़गारी दर कुल उपलब्ध कार्यबल का 6.1 प्रतिशत रही, जो 45 साल में सर्वाधिक है। सरकार के जारी आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में रोज़गार योग्य युवाओं में 7.8 प्रतिशत बेरोज़गार रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 5.3 प्रतिशत था।